केंद्रिय विद्यालय में कैंसर जागरूकता एवम् सतर्कता अभियान

आज दिनांक 27 अप्रैल 2017 में केंद्रीय  विद्यालय लखीमपुर – खीरी के विद्यार्थियों को कैन्सर की विस्तृत जानकारी दे कर उन्हें भविष्य में इस प्राण घातक एवम् लाईलाज बीमारी के प्रति जागरूक एवम् सतर्क किया गया I आज के बच्चे ही भावी  स्वच्छ एवम् स्वस्थ भारत के निर्माता होंगे I ” कैंसर जागरूकता एवम् सतर्कता अभियान” विषय पर  विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती सावित्री देवी ने अपने अभिभाषण में कहा कि सही समय पर सही जानकारी एवम्  सही उपाय कर  ही हम इस  प्राण घातक एवम् लाईलाज बीमारी से अपना, अपने समाज एवम् अपने देश को स्वस्थ एवम् विकसित कर सकते हैं I इस का सफल एवम सार्थक संचालन वियालय की हिन्दी शिक्षिका श्रीमती मधु शर्मा ने किया I विद्यालय के पुस्तकालायाधक्ष श्री जयन्त कुमार सिंघा ने कम्पुटरीकृत सूचना एवम् सम्प्रेषण सेवाएँ प्रदान कर कैंसर सम्बन्धित सम्पूर्ण जानकारी  चलचित्र के माध्यम से उपलब्ध किया I

kendriyaWhat Is Cancer In Hindi: कैंसर जानलेवा बीमारी है। कैंसर के मरीज जल्‍दी ठीक नही होते हैं क्‍योंकि इसके लक्षणों का पता देर से चलता है। कैंसर के बारे में ज्‍यादा जानकारी के लिए इस केटेगरी को पढ़ें। कैंसर क्‍या है, कैंसर के लक्षण क्‍या हैं, कैंसर के विभिन्‍न प्रकार, सर्वाइकल कैंसर, ब्‍लैडर कैंसर, कोलोरेक्‍टल कैंसर, स्‍तन कैंसर, ब्रेन ट्यूमर, एसोफैगल कैंसर, पैंक्रियाटिक कैंसर, बोन कैंसर ब्‍लड कैंसर, इत्यादि I

ओरल कैंसर: Oral Cancer in Hindi: जब शरीर के ओरल कैविटी के किसी भी भाग में कैंसर होता है तो इसे ओरल कैंसर कहा जाता है। ओरल कैविटी में होंठ, गाल, लार ग्रंथिया, कोमल व हार्ड तालू, यूवुला, मसूडों, टॉन्सिल, जीभ और जीभ के अंदर का हिस्‍सा आते हैं। इस कैंसर के होने का कारण ओरल कैविटी के भागों में कोशिकाओं की अनियमित वृद्धि होती है। ओरल कैंसर होने का जोखिम उम्र के साथ बढ़ता है। ओरल कैंसर के कई कारण जैसे, तम्‍बाकू (तंबाकू, सिगरेट, पान मसाला, पान, गुटखा) व शराब का अधिक तथा ओरल सेक्स व मुंह की साफ-सफाई ठीक से न करना आदि हैं। इसकी पहचान के लिये डॉक्टर होठों, ओरल कैविटी, फारनेक्स (मुंह के पीछे, चेहरा और गर्दन) में शारीरिक जांच कर किसी प्रकार की सूजन, धब्बे वाले टिश्यू व घाव आदि की जांच करता है। कोई भी जख्म या अल्सर आदि मिलने पर उसकी बायोप्सी की जाती है, इसके बाद एंडोस्‍कोपिक जांच, इमेजिंग इन्वेस्टिगेशन्स (कम्प्यूटिड टोमोग्राफी अर्थात सीटी), मैगनेटिक रिसोनेन्स इमेजिंग (एमआरआई) और अल्ट्रासोनोग्राफी आदि की मदद से कैंसर की स्टेजेज का पता लगाया जाता है। इसका उपचार हर मरीज के लिए अलग हो सकता है।

देश प्रेम के गीत

मेरे देश कि धरती कि धरती सोना उगले,उगले हीरे मोती

गीतकार: इंदीवर

मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती
मेरे देश की धरती

बैलों के गले में जब घुँघरू जीवन का राग सुनाते हैं
ग़म कोस दूर हो जाता है खुशियों के कंवल मुस्काते हैं
सुन के रहट की आवाज़ें यूँ लगे कहीं शहनाई बजे
आते ही मस्त बहारों के दुल्हन की तरह हर खेत सजे

मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती
मेरे देश की धरती

जब चलते हैं इस धरती पे हल ममता अँगड़ाइयाँ लेती है
क्यों ना पूजें इस माटी को जो जीवन का सुख देती है
इस धरती पे जिसने जन्म लिया उसने ही पाया प्यार तेरा
यहाँ अपना पराया कोई नही हैं सब पे है माँ उपकार तेरा

मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती
मेरे देश की धरती

ये बाग़ हैं गौतम नानक का खिलते हैं अमन के फूल यहाँ
गांधी, सुभाष, टैगोर, तिलक ऐसे हैं चमन के फूल यहाँ
रंग हरा हरिसिंह नलवे से रंग लाल है लाल बहादुर से
रंग बना बसंती भगतसिंह से रंग अमन का वीर जवाहर से

मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती
मेरे देश की धरती

रचनाकार: शकील बदायूनी

नन्हा मुन्ना राही हूँ, देश का सिपाही हूँ
बोलो मेरे संग, जय हिन्द, जय हिन्द, जय हिन्द

रस्ते पे चलूंगा न डर-डर के
चाहे मुझे जीना पड़े मर-मर के
मंज़िल से पहले ना लूंगा कहीं दम
आगे ही आगे बढाऊँगा कदम
दाहिने बाएं दाहिने बाएं, थम!
नन्हा मुन्ना राही हूँ…

धूप में पसीना बहाऊँगा जहाँ
हरे-भरे खेत लहराएगें वहाँ
धरती पे फाके न पाएगें जन्म
आगे ही आगे …

नया है ज़माना मेरी नई है डगर
देश को बनाऊँगा मशीनों का नगर
भारत किसी से न रहेगा कम
आगे ही आगे …

बड़ा हो के देश का सितारा बनूंगा
दुनिया की आँखो का तारा बनूंगा
रखूँगा ऊँचा तिरंगा हरदम
आगे ही आगे …

शांति की नगरी है मेरा ये वतन
सबको सिखाऊँगा प्यार का चलन
दुनिया मे गिरने न दूँगा कहीं बम
आगे ही आगे …

छोड़ो कल की बातें कल की बात पुरानी

गीतकार: शकील बदायूनी

इन्साफ की डगर पे, बच्चों दिखाओ चल के
ये देश है तुम्हारा, नेता तुम्ही हो कल के

दुनिया के रंज सहना और, कुछ ना मुँह से कहना
सच्चाईयों के बल पे, आगे को बढ़ते रहना
रख दोगे एक दिन तुम, संसार को बदल के
इन्साफ की डगर पे…

अपने हों या पराए, सब के लिए हो न्याय
देखो कदम तुम्हारा, हरगिज़ ना डगमगाए
रस्ते बड़े कठिन हैं, चलना संभल-संभल के
इन्साफ की डगर पे…

इन्सानियत के सर पे, इज़्ज़त का ताज रखना
तन मन की भेंट देकर, भारत की लाज रखना
जीवन नया मिलेगा, अंतिम चिता में जल के
इन्साफ की डगर पे…

THIS SONG WAS LIKED BY THE STUDENTS OF CLASS – VI (2017 – 18)  OF KENDRIYA VIDYALAYA LAKHIMPUR – KHERI .

दे दी हमें आज़ादी बिना खड्‌ग बिना ढाल

गीतकार: पंडित प्रदीप शर्मा 

दे दी हमें आज़ादी बिना खड्‌ग बिना ढाल
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल
आंधी में भी जलती रही गांधी तेरी मशाल
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल

धरती पे लड़ी तूने अजब ढंग की लड़ाई
दागी न कहीं तोप न बंदूक चलाई
दुश्मन के किले पर भी न की तूने चढ़ाई
वाह रे फकीर खूब करामात दिखाई
चुटकी में दुश्मनों को दिया देश से निकाल
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल
रघुपति राघव राजा राम

शतरंज बिछा कर यहाँ बैठा था ज़माना
लगता था कि मुश्किल है फिरंगी को हराना
टक्कर थी बड़े ज़ोर की दुश्मन भी था दाना
पर तू भी था बापू बड़ा उस्ताद पुराना
मारा वो कस के दांव कि उल्टी सभी की चाल
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल
रघुपति राघव रजा राम

जब जब तेरा बिगुल बजा जवान चल पड़े
मजदूर चल पड़े थे और किसान चल पड़े
हिन्दू मुसलमान सिख पठान चल पड़े
कदमों पे तेरे कोटि कोटि प्राण चल पड़े
फूलों की सेज छोड़ के दौड़े जवाहरलाल
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल
रघुपति राघव रजा राम

मन में थी अहिंसा की लगन तन पे लंगोटी
लाखों में घूमता था लिये सत्य की सोंटी
वैसे तो देखने में थी हस्ती तेरी छोटी
लेकिन तुझे झुकती थी हिमालय की भी चोटी
दुनिया में तू बेजोड़ था इंसान बेमिसाल
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल
रघुपति राघव रजा राम

जग में कोई जिया है तो बापू तू ही जिया
तूने वतन की राह में सबकुछ लुटा दिया
मांगा न कोई तख्त न तो ताज ही लिया
अमृत दिया सभी को मगर खुद ज़हर पिया
जिस दिन तेरी चिता जली रोया था महाकाल
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल
रघुपति राघव रजा राम

इन्साफ की डगर पे, बच्चों दिखाओ चल के

गीतकार: शकील बदायूनी                 

इन्साफ की डगर पे, बच्चों दिखाओ चल के
ये देश है तुम्हारा, नेता तुम्ही हो कल के

दुनिया के रंज सहना और, कुछ ना मुँह से कहना
सच्चाईयों के बल पे, आगे को बढ़ते रहना
रख दोगे एक दिन तुम, संसार को बदल के
इन्साफ की डगर पे…

अपने हों या पराए, सब के लिए हो न्याय
देखो कदम तुम्हारा, हरगिज़ ना डगमगाए
रस्ते बड़े कठिन हैं, चलना संभल-संभल के
इन्साफ की डगर पे…

इन्सानियत के सर पे, इज़्ज़त का ताज रखना
तन मन की भेंट देकर, भारत की लाज रखना
जीवन नया मिलेगा, अंतिम चिता में जल के
इन्साफ की डगर पे…

ऐ वतन ऐ वतन हमको तेरी क़सम

गीतकार: प्रेम धवन                 

तू ना रोना, कि तू है भगत सिंह की माँ
मर के भी लाल तेरा मरेगा नहीं
डोली चढ़के तो लाते है दुल्हन सभी
हँसके हर कोई फाँसी चढ़ेगा नहीं

जलते भी गये कहते भी गये
आज़ादी के परवाने
जीना तो उसी का जीना है
जो मरना देश पर जाने

जब शहीदों की डोली उठे धूम से
देशवालों तुम आँसू बहाना नहीं
पर मनाओ जब आज़ाद भारत का दिन
उस घड़ी तुम हमें भूल जाना नहीं

ऐ वतन ऐ वतन हमको तेरी क़सम
तेरी राहों में जां तक लुटा जायेंगे
फूल क्या चीज़ है तेरे कदमों पे हम
भेंट अपने सरों की चढ़ा जायेंगे
ऐ वतन ऐ वतन

कोई पंजाब से, कोई महाराष्ट्र से
कोई यूपी से है, कोई बंगाल से
तेरी पूजा की थाली में लाये हैं हम
फूल हर रंग के, आज हर डाल से
नाम कुछ भी सही पर लगन एक है
जोत से जोत दिल की जगा जायेंगे
ऐ वतन ऐ वतन …

तेरी जानिब उठी जो कहर की नज़र
उस नज़र को झुका के ही दम लेंगे हम
तेरी धरती पे है जो कदम ग़ैर का
उस कदम का निशां तक मिटा देंगे हम
जो भी दीवार आयेगी अब सामने
ठोकरों से उसे हम गिरा जायेंगे

कर चले हम फ़िदा, जान-ओ-तन साथीयों

रचनाकार: कैफी आज़मी                 

कर चले हम फ़िदा, जान-ओ-तन साथीयों
अब तुम्हारे हवाले वतन साथीयों …

सांस थमती गई, नब्ज जमती गई,
फिर भी बढ़ते कदम को ना रुकने दिया
कट गये सर हमारे तो कुछ ग़म नहीं
सर हिमालय का हमने न झुकने दिया
मरते मरते रहा बाँकपन साथीयों
अब तुम्हारे हवाले वतन साथीयों …

जिन्दा रहने के मौसम बहुत हैं मगर
जान देने की रुत रोज आती नहीं
हुस्न और इश्क दोनो को रुसवा करे
वो जवानी जो खूँ में नहाती नहीं
बाँध लो अपने सर पर कफ़न साथीयों
अब तुम्हारे हवाले वतन साथीयों …

राह कुर्बानियों की ना वीरान हो
तुम सजाते ही रहना नये काफ़िले
फ़तह का जश्न इस जश्न के बाद है
जिन्दगी मौत से मिल रही है गले
आज धरती बनी है दुल्हन साथीयों
अब तुम्हारे हवाले वतन साथीयों …

खेंच दो अपने खूँ से जमीं पर लकीर
इस तरफ आने पाये ना रावण कोई
तोड़ दो हाथ अगर हाथ उठने लगे
छूने पाये ना सीता का दामन कोई
राम भी तुम तुम्हीं लक्ष्मण साथीयों
अब तुम्हारे हवाले वतन साथीयों …

ऐ मेरे प्यारे वतन, ऐ मेरे बिछड़े चमन

गीतकार: गुलजार                 

ऐ मेरे प्यारे वतन, ऐ मेरे बिछड़े चमन
तुझपे दिल कुर्बान, तू ही मेरी आरज़ू
तू ही मेरी आबरू, तू ही मेरी जान

माँ का दिल बन के कभी सीने से लग जाता है तू
और कभी नन्हीं सी बेटी बन के याद आता है तू
जितना याद आता है मुझको, उतना तड़पाता है तू
तुझपे दिल कुर्बान…

तेरे दामन से जो आए उन हवाओं को सलाम
चूम लूँ मैं उस ज़ुबां को जिसपे आए तेरा नाम
सबसे प्यारी सुबह तेरी, सबसे रंगीं तेरी शाम
तुझपे दिल कुर्बान…

छोड़ कर तेरी गली को दूर आ पहुंचे हैं हम
है मगर ये ही तमन्ना तेरे ज़र्रों की कसम
जिस जगह पैदा हुए थे, उस जगह ही निकले दम
तुझपे दिल कुर्बान…

youtube.cowww-m/watch?v=93NLol3gXm8

अपनी आज़ादी को हम हरगिज़ मिटा सकते नहीं

गीतकार: शकील बदायूनी                 

अपनी आज़ादी को हम हरगिज़ मिटा सकते नहीं
सर कटा सकते हैं लेकिन सर झुका सकते नहीं

हमने सदियों में ये आज़ादी की नेमत पाई है
सैंकड़ों कुर्बानियाँ देकर ये दौलत पाई है
मुस्कुरा कर खाई हैं सीनों पे अपने गोलियां
कितने वीरानो से गुज़रे हैं तो जन्नत पाई है
ख़ाक में हम अपनी इज्ज़़त को मिला सकते नहीं
अपनी आज़ादी को हम हरगिज़ मिटा सकते नहीं…

क्या चलेगी ज़ुल्म की अहले-वफ़ा के सामने
आ नहीं सकता कोई शोला हवा के सामने
लाख फ़ौजें ले के आए अमन का दुश्मन कोई
रुक नहीं सकता हमारी एकता के सामने
हम वो पत्थर हैं जिसे दुश्मन हिला सकते नहीं
अपनी आज़ादी को हम हरगिज़ मिटा सकते नहीं…

वक़्त की आवाज़ के हम साथ चलते जाएंगे
हर क़दम पर ज़िन्दगी का रुख बदलते जाएंगे
’गर वतन में भी मिलेगा कोई गद्दारे वतन
अपनी ताकत से हम उसका सर कुचलते जाएंगे
एक धोखा खा चुके हैं और खा सकते नहीं
अपनी आज़ादी को हम हरगिज़ मिटा सकते नहीं…

हम वतन के नौजवाँ है हम से जो टकरायेगा
वो हमारी ठोकरों से ख़ाक में मिल जायेगा
वक़्त के तूफ़ान में बह जाएंगे ज़ुल्मो-सितम
आसमां पर ये तिरंगा उम्र भर लहरायेगा
जो सबक बापू ने सिखलाया भुला सकते नहीं
सर कटा सकते है लेकिन सर झुका सकते नहीं…

है प्रीत जहाँ की रीत सदा, मैं गीत वहाँ के गाता हूँ

गीतकार: इंदीवर                 

जब ज़ीरो दिया मेरे भारत ने, दुनिया को तब गिनती आई
तारों की भाषा भारत ने, दुनिया को पहले सिखलाई

देता ना दशमलव भारत तो, यूँ चाँद पे जाना मुश्किल था
धरती और चाँद की दूरी का, अंदाज़ लगाना मुश्किल था

सभ्यता जहाँ पहले आई, पहले जनमी है जहाँ पे कला
अपना भारत वो भारत है, जिसके पीछे संसार चला
संसार चला और आगे बढ़ा, ज्यूँ आगे बढ़ा, बढ़ता ही गया
भगवान करे ये और बढ़े, बढ़ता ही रहे और फूले-फले

है प्रीत जहाँ की रीत सदा, मैं गीत वहाँ के गाता हूँ
भारत का रहने वाला हूँ, भारत की बात सुनाता हूँ

काले-गोरे का भेद नहीं, हर दिल से हमारा नाता है
कुछ और न आता हो हमको, हमें प्यार निभाना आता है
जिसे मान चुकी सारी दुनिया, मैं बात वही दोहराता हूँ
भारत का रहने वाला हूँ, भारत की बात सुनाता हूँ

जीते हो किसीने देश तो क्या, हमने तो दिलों को जीता है
जहाँ राम अभी तक है नर में, नारी में अभी तक सीता है
इतने पावन हैं लोग जहाँ, मैं नित-नित शीश झुकाता हूँ
भारत का रहने वाला हूँ, भारत की बात सुनाता हूँ

इतनी ममता नदियों को भी, जहाँ माता कहके बुलाते है
इतना आदर इन्सान तो क्या, पत्थर भी पूजे जातें है
उस धरती पे मैंने जन्म लिया, ये सोच के मैं इतराता हूँ
भारत का रहने वाला हूँ, भारत की बात सुनाता हूँ

हम लाये हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के

गीतकार: प्रदीप                 

 

पासे सभी उलट गए दुश्मन की चाल के
अक्षर सभी पलट गए भारत के भाल के
मंजिल पे आया मुल्क हर बला को टाल के
सदियों के बाद फिर उड़े बादल गुलाल के

हम लाये हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चो संभाल के
तुम ही भविष्य हो मेरे भारत विशाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चो संभाल के …

देखो कहीं बरबाद न होवे ये बगीचा
इसको हृदय के खून से बापू ने है सींचा
रक्खा है ये चिराग शहीदों ने बाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चो संभाल के
हम लाये हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के…

दुनिया के दांव पेंच से रखना न वास्ता
मंजिल तुम्हारी दूर है लंबा है रास्ता
भटका न दे कोई तुम्हें धोके मे डाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चो संभाल के
हम लाये हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के…

एटम बमों के जोर पे ऐंठी है ये दुनिया
बारूद के इक ढेर पे बैठी है ये दुनिया
तुम हर कदम उठाना जरा देखभाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चो संभाल के
हम लाये हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के…

आराम की तुम भूल भुलय्या में न भूलो
सपनों के हिंडोलों मे मगन हो के न झुलो
अब वक़्त आ गया मेरे हंसते हुए फूलो
उठो छलांग मार के आकाश को छू लो
तुम गाड़ दो गगन में तिरंगा उछाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चो संभाल के
हम लाये हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के…

youtube.cowww-m/watch?v=93NLol3gXm8

रचनाकार: राजिन्दर कृष्ण संगीतकार=हंस राज बहल                 

   
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु
गुरुदेव महेश्वरा
गुरु साक्षात परब्रह्म
तत्समये श्री गुरुवे नम:

जहाँ डाल डाल पर सोने की चिड़ियाँ करती है बसेरा
वो भारत देश है मेरा।

जहाँ सत्य अहिंसा और धर्म का पग-पग लगता डेरा
वो भारत देश है मेरा।

ये धरती वो जहाँ ॠषि मुनि जपते प्रभु नाम की माला
जहाँ हर बालक एक मोहन है और राधा हर एक बाला
जहाँ सूरज सबसे पहले आ कर डाले अपना फेरा
वो भारत देश है मेरा।

अलबेलों की इस धरती के त्योहार भी हैं अलबेले
कहीं दीवाली की जगमग है कहीं हैं होली के मेले
जहाँ राग रंग और हँसी खुशी का चारों ओर है घेरा
वो भारत देश है मेरा।

जहाँ आसमान से बातें करते मंदिर और शिवाले
जहाँ किसी नगर में किसी द्वार पर कोई न ताला डाले
प्रेम की बंसी जहाँ बजाता है ये शाम सवेरा
वो भारत देश है मेरा।

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आओ बच्चो तुम्हे दिखायै झांकी हिंदुस्तन की

प्रेरणादायक कहानियाँ

पंचतंत्र की पांच प्रसिद्ध कहानियाँ

दोस्तों ! आपने बचपन में पंचतंत्र की कहानियाँ जरुर पढ़ी होगी. मैंने तो बहुत पढ़ी, मैं बचपन में बहुत कहानियाँ पढ़ता था. जो Knowledge देने के साथ – साथ मेरा मनोरंजन भी करती थी. आज मैं आपके साथ अपने बचपन की पंचतंत्र की 5 प्रसिद्ध कहानियाँ शेयर कर रहा हूँ जो मुझे बहुत पसंद है. इन कहानियों को पढने से न सिर्फ आपको मजा आएगा बल्कि आपको ज्ञान भी मिलेगा.

Best 5 panchatantra Stories In HIndi पंचतंत्र की पांच प्रसिद्ध कहानियाँ

Story No. 1 – पानी और प्यासा कौआ (A Thirsty crow)

Best 5 panchatantra Stories In HIndi पंचतंत्र की पांच प्रसिद्ध कहानियाँ

गर्मियों के दिन थे. दोपहर के समय बहुत ही सख्त गर्मी पड़ रही थी. एक कौआ पानी की तलाश में इधर – उधर भटक रहा था. लेकिन उसे कही भी पानी नहीं मिला. अंत में वह थका हुआ एक बाग में पहुँचा. वह पेड़ की शाखा पर बैठा हुआ था की अचानक उसकी नजर वृक्ष के नीचे पड़े एक घड़े पर गई. वह उड़कर घड़े के पास चला गया.

वहां उसने देखा कि घड़े में थोड़ा पानी है. वह पानी पीने के लिए नीचे झुका लेकिन उसकी चोंच पानी तक न पहुँच सकी. ऐसा इसलिए हो रहा था क्योंकि घड़े में पानी बहुत कम था.

परन्तु वह कौआ हताश नहीं हुआ बल्कि पानी पीने के लिए उपाय सोचने लगा. तभी उसे एक उपाय सूझा. उसने आस – पास बिखरे हुए कंकर उठाकर घड़े में डालने शुरू कर दिए. लगातार पानी में कंकड़ डालने से पानी ऊपर आ गया. फिर उसने आराम से पानी पिया और उड़ गया.

इस कहानी से शिक्षा :

दोस्तों जहाँ चाह होती है वहीँ राह होती है. कौवे को पानी की बहुत ज्यादा प्यास लगी थी. उसे पानी की बहुत आवश्यकता थी. जब उसे घड़े में पानी मिला तो वह Idea ढूंढने लगा और पानी पीने में मे कामयाब भी हुआ. हमें भी इस कहानी से यह जरुर सीखना चाहिए कि अगर हमें भी कुछ पाना है या हमें भी सफल होना है तो पहले हमारे अन्दर यह सोच आनी चाहिए की हमें भी सफल होना है.

अगर हम सफल होने के लिए अपने कदम बढ़ाएंगे तो हमें सफलता प्राप्त करने के रास्ते आसानी से मिलने लगेंगे. जहाँ चाह वहां राह और आवश्यकता ही हमेशा अविष्कार की जननी होती है.

Story No. 2 – एक चालाक लोमड़ी (A Clever Fox)

एक लोमड़ी बहुत भूखी थी. वह अपनी भूख मिटने के लिए भोजन की खोज में इधर – उधर घूमने लगी. जब उसे सारे जंगल में भटकने के बाद भी कुछ न मिला तो वह गर्मी और भूख से परेशान होकर एक पेड़ के नीचे बैठ गई. अचानक उसकी नजर ऊपर गई. पेड़ पर एक कौआ बैठा हुआ था. उसके मुंह में रोटी का एक टुकड़ा था. कौवे को देखकर लोमड़ी के मुँह में पानी भर आया. वह कौवे से रोटी छीनने का उपाय सोचने लगी.

तभी उसने कौवे को कहा, ” क्यों भई कौआ भैया ! सुना है तुम गीत बहुत अच्छे गाते हो. क्या मुझे गीत नहीं सुनाओगे ?. कौआ अपनी प्रशंसा को सुनकर बहुत खुश हुआ. वह लोमड़ी की बातो में आ गया. गाना गाने के लिए उसने जैसे ही अपना मुँह खोला, रोटी का टुकड़ा नीचे गिर गया. लोमड़ी ने झट से वह टुकड़ा उठाया और वहां से भाग गई. अब कौआ अपनी मूर्खता पर पछताने लगा.

इस कहानी से शिक्षा :

यह छोटी कहानी हमें स्पष्ट सन्देश देती है की कभी भी हो अपनी झूठी प्रशंसा से हमें बचना चाहिए. कई बार हमारी Life में हमें कई ऐसे लोग मिलते है जो हमसे अपना Important काम निकालने के लिए हमारी झूठी तारीफ़ करते है. एक बार जब वे हमसे अपना काम निकाल लेते है तो उसके बाद फिर हमें पूछते भी नहीं. इसलिए हमेशा झूठी प्रसंशा से बचे.

Story No. 3 – दो बिल्लियाँ और बन्दर ( Two cats and a monkey)

एक नगर में दो बिल्लियाँ रहती थी. एक दिन उन्हें रोटी का एक टुकड़ा मिला. वे दोनों आपस में लड़ने लगी. वे उस रोटी के टुकड़े को दो समान भागों में बाँटना चाहती थी लेकिन उन्हें कोई ढंग नहीं मिल पाया.

उसी समय एक बन्दर उधर से निकल रहा था. वह बहुत ही चालाक था. उसने बिल्लियों से लड़ने का कारण पूछा. बिल्लियों ने उसे सारी बात सुनाई. वह तराजू ले आया और बोला, ” लाओ, मैं तुम्हारी रोटी को बराबर बाँट देता हूँ. उसने रोटी के दो टुकड़े लेकर एक – एक पलड़े में रख दिए. वह बन्दर तराजू में जब रोटी को तोलता तो जिस पलड़े में रोटी अधिक होती, बन्दर उसे थोड़ी – सी तोड़ कर खा लेता.

इस प्रकार थोड़ी – सी रोटी रह गई. बिल्लियों ने अपनी रोटी वापस मांगी. लेकिन बन्दर ने शेष बची रोटी भी मुँह में डाल ली. फिर बिल्लियाँ उसका मुँह देखती रह गई.

इस कहानी से शिक्षा :

बचपन से आपने सुना होगा की कभी भी हमें आपस में लड़ना नहीं चाहिए. कोई भी दोस्त या परिवार तब तक बहुत मजबूत होता है, जब तक उनमे आपसी प्यार और विश्वास होता है.

एक बार जब वह आपस में लड़ने लग जाते है तो इससे दूसरे लोग भी फायदा उठाते है. वह इस लड़ाई को बड़ा बनाकर अपना मुनाफा ढूंढ लेते है. इसलिए लड़ने से अच्छा है एक साथ रहना. किसी भी Problem या मुसीबत को मिलकर दूर करना.

Story No. 4 – अंगूर खट्टे है (The Grapes Are Sour)

एक बार एक लोमड़ी बहुत भूखी थी. वह भोजन की तलाश में इधर – उधर भटकती रही लेकिन कही से भी उसे कुछ भी खाने को नहीं मिला. अंत में थक हारकर वह एक बाग़ में पहुँच गयी. वहां उसने अंगूर की एक बेल देखी. जिसपर अंगूर के गुच्छे लगे थे.

वह उन्हें देखकर बहुत खुश हुई. वह अंगूरों को खाना चाहती थी, पर अंगूर बहुत ऊँचे थे. वह अंगूरों को पाने के लिए ऊँची – ऊँची छलांगे लगाने लगी. किन्तु वह उन तक पहुँच न सकी. वह ऐसा करते – करते बहुत थक चुकी थी. आखिर वह बाग से बाहर जाते हुए कहने लगी कि अंगूर खट्टे है. अगर मैं इन्हें खाऊँगी तो बीमार हो जाउंगी.

इस कहानी से शिक्षा :

दोस्तों कभी भी हो हमें हर चीज या हालात में हमेशा अच्छाई ढूंढनी चहिये. हम अगर कोई चीज प्राप्त न कर सके तो उसे बुरा नहीं कहना चाहिए. बहुत सारे लोगो की यह प्रॉब्लम होती है की वह अगर किसी चीज में Succes नहीं हुए या कोई काम कर न सके तो वह खुद में कमियां देखने के बजाय उस काम में ही कमियाँ निकालने लगते है. हमें लोमड़ी की तरह अंगूर खट्टे है कभी नहीं बोलना है.

Story No. 5 – लालची कुत्ता (A Greedy Dog)

एक गाँव में एक कुत्ता था. वह बहुत लालची था. वह भोजन की खोज में इधर – उधर भटकता रहा. लेकिन कही भी उसे भोजन नहीं मिला. अंत में उसे एक होटल के बाहर से मांस का एक टुकड़ा मिला. वह उसे अकेले में बैठकर खाना चाहता था. इसलिए वह उसे लेकर भाग गया.

एकांत स्थल की खोज करते – करते वह एक नदी के किनारे पहुँच गया. अचानक उसने अपनी परछाई नदी में देखी. उसने समझा की पानी में कोई दूसरा कुत्ता है जिसके मुँह में भी मांस का टुकड़ा है.

उसने सोचा क्यों न इसका टुकड़ा भी छीन लिया जाए तो खाने का मजा दोगुना हो जाएगा. वह उस पर जोर से भौंका. भौंकने से उसका अपना मांस का टुकड़ा भी नदी में गिर पड़ा. अब वह अपना टुकड़ा भी खो बैठा. अब वह बहुत पछताया तथा मुँह लटकाता हुआ गाँव को वापस आ गया.

इस कहानी से शिक्षा :

लालच बुरी बला है. हमें कभी भी लालच नहीं करना चाहिए. जो भी इंसान लालच करता है वह अपनी लाइफ में कभी भी खुश नहीं रह सकता. हमें अपनी मेहनत या किस्मत का जितना भी मिल गया. उससे अपना काम निकालना चाहिए.

लेकिन अगर हम थोड़ा ज्यादा के चक्कर में लालच करेंगे तो हमारे पास अभी जितना है उससे भी हाथ धोना पड़ सकता है. इसलिए कहते है ज्यादा लालच अच्छा नहीं होता.

दोस्तों ! हमें पूरी उम्मीद है की आपको पंचतन्त्र की ये 5 प्रसिद्ध कहानियाँ जरुर पसंद आई होगी. अपनी राय अवश्य दे.

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*. महात्मा और मुर्ख व्यक्ति हिंदी कहानी
*. क्या है असली ख़ुशी का राज हिंदी कहानी
*. समस्या का क्या है समाधान हिंदी कहानी

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ऋषि और एक चूहे की कहानी

एक वन में एक महातप नाम के ऋषि रहते थे. उनके डेरे पर बहुत दिनों से एक चूहा भी रहता आ रहा था. यह चूहा ऋषि से बहुत प्यार करता था.

जब वे तपस्या में मग्न होते तो वह बड़े आनंद से उनके पास बैठा भजन सुनता रहता. यहाँ तक कि वह स्वयं भी ईश्वर की उपासना करने लगा था. लेकिन कुत्ते – बिल्ली और चील – कौवे आदि से वह सदा डरा – डरा और सहमा हुआ सा रहता.

Rat became a Lion In Hindi
चूहा बना शेर

एक बार ऋषि के मन में दया आ गयी. वे सोचने लगे कि यह बेचारा चूहा हर समय डरा – सा रहता है, क्यों न इसे शेर बना दिया जाए. ताकि इस बेचारे का डर समाप्त हो जाए और यह बेधड़क होकर हर स्थान पर घूम सके.

महातप ऋषि बहुत बड़ी शक्ति के स्वामी थे. भगवान से जो भी मांगते थे, उन्हें वही मिल जाता. बस, उसी समय उन्होंने सच्चे मन से ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहा कि हे प्रभु ! इस चूहे को शेर बना दे ताकि यह बेचारा किसी भी जानवर से न डरे और निर्भय होकर जहाँ चाहे घूम सके.

ईश्वर ने उनकी प्रार्थना सुन ली और उसी समय वह चूहा शेर बन गया. चूहे से शेर बनते ही चूहे की सारी सोच बदल गई. वह सारे वन में बेधड़क घूमता. उससे अब सारे जानवर डरने लगे और प्रणाम करने लगे. उसकी जय – जयकार होने लगी. किन्तु ऋषि ही यह बात जानते थे कि यह मात्र एक चूहा है. वास्तव में शेर नहीं है.

अतः उसे चूहा समझकर ही व्यवहार करते. यह बात उसे पसंद नहीं आई. अब भी कोई उसे चूहा समझ कर ही व्यवहार करे. इससे तो दूसरे जानवरों पर बुरा असर पड़ेगा. लोग उसका जितना मान करते है, उससे अधिक घृणा और अनादर करना आरम्भ कर देंगे.

अतः चूहे ने सोचा कि क्यों न मैं इस ऋषि को मार डालूं. फिर न रहेगा बाँस, न बजेगी बांसुरी.यही सोचकर वह ऋषि को मारने के लिए चल पड़ा. ऋषि ने जैसे ही क्रोध से भरे शेर को अपनी ओर आते देखा तो वे उसके मन की बात समझ गये. उनके शेर पर बड़ा क्रोध आया.

अतः उसका घमंड तोड़ने के लिए उन्होंने अपनी शक्ति से उसे एक बार फिर चूहा बना दिया.

इस कहानी से शिक्षा :

दोस्तों ! हमें कभी भी अपने हितैषी का अहित नहीं करना चाहिए, चाहे हम कितने ही बलशाली क्यों न हो जाए. हमें उन लोगो को हमेशा याद रखना चाहिए जिन्होंने बुरे वक्त में हमारा साथ दिया होता है.

इसके अलावा हमें अपने बीते वक्त को भी नहीं भूलना चाहिए. चूहा यदि अपनी असलियत याद रखता तो उसे फिर से चूहा नहीं बनना पड़ता. बीता हुआ समय हमें घमंड से बाहर निकालता है.

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शेर और भैंस की कहानी

एक बार की बात है.. एक जंगल में जंगली भैंसों का झुण्ड घूम रहा था जिसमे एक छोटा बछड़ा भी अपने पिता यानि भैंसे के साथ चलने में लगा था. तभी वह छोटा बछड़ा बोला, ” पिताजी, आप मुझे यह बताये क्या इस जंगल में कोई ऐसी चीज है जिससे हमें डरने की जरूरत है ?

भैंसा बोला, ” तुम बस शेरो से सावधान रहना.

 Buffalo and Lion

हाँ, यह मैंने भी सुना है कि शेर बहुत ही खूंखार और खतरनाक होते है. मेरी जिंदगी में अगर कभी मेरे सामने शेर आएगा तो मैं जितना हो सके उतनी तेजी से दौड़ लगा के भाग जाऊंगा, ” बछड़ा बोला.

ऐसा करना तो बहुत ही बुरी बात हुई. यह ठीक नहीं हुआ, ” भैंसा बोला

बछड़े को यह बात सुनकर थोड़ा आश्चर्य हुआ और बोला, ” क्यों ? शेर तो बहुत ही खतरनाक होते है और मैं अगर भागूँगा नहीं तो वे तो मेरी जान ले लेंगे और मुझे मार देंगे.

भैंसा बोला, ” तुम ठीक कहते हो परन्तु अगर तुम शेर को देखकर भागने लगे तो वे तुम्हारा पीछा करने लग जायेंगे और तब भागते समय वो तुम्हारी पीठ पर बहुत ही आसानी से हमला कर सकते है और तुमको नीचे गिरा सकते है, अगर तुम एक बार भी नीचे गिर गये तो समझ लो की तुम्हारी मौत पक्की है.

तो फिर मुझे ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिये, ” बछड़े ने पुछा.

भैंसा उसे बड़ी गंभीरता से समझाने लगा और बोला, ” अगर कभी भी तुम शेर को देखो या उससे सामना हो जाए तब तुम अपनी जगह पर डटकर खड़े हो जाओ और उसे यह दिखाओ की तुम बिल्कुल भी डरे नहीं हो. अगर वो वहां से न जाए तो उसे अपनी तेज सींगे दिखाओ और अपने खुरों को जमीन पर पटको. अगर फिर भी शेर न जाए तो धीरे – धीरे उसके सामने की ओर बढ़ो और फिर तेजी से पूरी ताकत लगा कर उसपर हमला कर दो.

 ऐसा करने पर तो बहुत ही खतरा हुआ, यह तो पागलों वाला काम हुआ. अगर शेर पलट कर मुझ पर ही झपट पड़ा तो ? बछड़ा हडबडाहट में बोला.

 तुम अपने चारो तरफ देखो.. तुमको क्या दिखाई देता है ? भैंसा बोला.

 बछड़े ने चारो तरफ देखा तो उसके आसपास ताकतवर भैंसों का बहुत बड़ा झुण्ड था.

 जीवन में अगर कभी भी तुम पर मुसीबत आये तो यह याद रखना की हम सब तुम्हारे साथ है. अगर तुम उस मुसीबत का सामने करने के बजाय भाग जाओगे तो हम तुम्हे नहीं बचा पाएंगे पर अगर तुम हिम्मत करके उस मुसीबत का सामना करोगे तो हम सब तुम्हारी सहायता के लिए तुम्हारे साथ आ जायेंगे.

 बछड़ा यह सुनकर खुश हुआ और अपने पिता को इतनी सीख देने के लिए धन्यवाद दिया.

 दोस्तों हमें इस कहानी से बहुत कुछ सीखना चाहिए.. मुसीबत हम सभी की ज़िन्दगी में आती है किन्तु वही इस मुसीबत से लड़ सकता है जो हिम्मत करके उस मुसीबत का सामना करे. हमारी ज़िन्दगी में भी कई ऐसी समस्याएँ होती है जिनसे हम डरते है और उस समस्या से भागना चाहते है और जब हम भागने लग जाते है तो वह हमारा पीछा करती है और हमारा जीना मुश्किल कर देती है.

 इसलिए उन समस्याओ को देखकर भागे नहीं बल्कि उन समस्याओ को हल करने के बारे में सोचे या मुसीबत से निकलने के लिए पुरे साहस के साथ लड़ते रहे. अगर आप उन मुसीबत या बुरे वक्त से नहीं डरोगे तो आपके परिवार वाले और दोस्त भी आपके साथ हमेशा खड़े रहेंगे और आपकी सहायता करेंगे.

 

  

ENGLISH POEM

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                 सोच – समझ कर बोलें

 

एक मुर्ख बिना सोचे – समझे कुछ भी बोल देता है, पर एक बुद्धिमान सोच – विचार कर ही कुछ कहता है.

शिव खेड़ा

जो मन में आये, वही बोलने से बाद में आदमी को वह सुनना पड़ता है, जो उसे पसंद नहीं होता. बोलने और व्यवहार करने में चतुर बने. इसका तात्पर्य यह है कि हम कुछ कहते वक्त अपने शब्दों का चुनाव होशियारी और समझदारी से करे

साथ ही इस बात का अनुमान भी हमें होना चाहिए कि उस बोलने का क्या परिणाम निकलेगा. अगर हम यह अनुमान लगाने में सक्षम होंगे, तो हम आसानी से विचार कर सकते है कि हमें क्या बोलना चाहिए और क्या नहीं बोलना चाहिए.

 बोलने की कला और व्यवहार कुशलता के बगैर प्रतिभा हमेशा हमारे काम नहीं आ सकती. शब्दों से हमारा नजरिया झलकता है. शब्द दिलों को जोड़ सकते है, तो हमारी भावनाओ को चोट भी पहुंचा सकते है और रिश्तों में दरार भी पैदा कर सकते है. सोच कर बोले, न की बोल के सोचे. समझदारी और बेवकूफी में यही बड़ा फर्क है.

 आइये इस बात को एक कहानी के माध्यम से समझते है-

 एक व्यक्ति ने एक पादरी के सामने अपने पड़ोसी की खूब निंदा कि. बाद में जब उसे अपनी गलती का अहसास हुआ, तो वह पुनः पादरी के पास पहुंचा और उस गलती के लिए क्षमा याचना करने लगा. पादरी ने उससे कहा कि वह पंखो से भरा एक थैला शहर के बीचोबीच बिखेर दे. उस व्यक्ति ने पादरी कि बात सुनकर ऐसा ही किया और फिर पादरी के पास पहुँच गया.

 उस व्यक्ति की बात सुनकर पादरी ने उससे कहा कि जाओ और उन सभी पंखो को फिर से थैले में भरकर वापस ले आओ. वह व्यक्ति थोड़ा हिचका पर पादरी का आदेश मानते हुए उसने ऐसा करने की कोशिश की. काफी प्रयत्न करने के बाद भी वह सभी पंखो जमा नहीं कर सका. जब आधा भरा थैला लेकर वह पादरी के सामने पहुंचा तो पादरी ने उससे कहा की यही बात हमारे जीवन में भी लागू होती है.

 जिस तरह तुम पंख वापस नहीं ला सकते, उसी तरह तुम्हारे कटु वचन को भी वापस नहीं किया जा सकता. उस व्यक्ति का जो नुकसान हुआ है, अब उसकी भरपाई संभव नहीं है. आलोचना का मतलब नकारात्मक बातें करना और शिकायत करना ही नहीं होता बल्कि आलोचना सकारात्मक भी हो सकती है. आपकी कोशिश यह होनी चहिये की आपकी आलोचना से, आपके द्वारा सुझाये विचारो से उसकी सहायता हो जाएँ.

 दोस्तों कई बार देखा गया है कि माँ – बाप के द्वारा बच्चो से की गई बातचीत का ढंग उनके भविष्य कि रूपरेखा भी तय कर देता है. इसलिए घर से लेकर बाहर तक कुछ भी कहने में सावधानी बरतें. यही बात दोस्तों के साथ होने वाली बातचीत में भी लागू होती है और ऑफिस या इंटरव्यू के दौरान भी लागू होती है. इसलिए अगर आप समझ कर बोलेंगे तो हमेशा फायदे में रहेंगे.

अकबर – बीरबल के रोचक किस्से

 

 

सम्राट अकबर की राज्यसभा में उनके नौ रत्न थे. उन रत्नों में बीरबल प्रमुख थे. अकबर समय-समय पर उन विद्वानों के सामने किसी समस्या के प्रश्नों को पूछते रहते थे.

 

सब अपनी बुद्धि से समाधान करते थे लेकिन उनमे सभी बीरबल के उत्तरों की प्रशंसा करते थे. बीरबल की बुद्धिमता के कई किस्से आपने जरुर सुने होंगे. यहाँ आज हम आपके सामने बीरबल की बुद्दिमानी का एक बेहतरीन किस्सा शेयर कर रहे है.

एक दिन उन विद्वानों के समक्ष अकबर ने प्रश्न पूछे- किस पौधे का फूल उत्तम होता है ?

दूध किसका श्रेष्ठ है ? किसका मिठास अच्छा है ? कौन सा पत्ता अच्छा है ?  राजाओ में कौन प्रशंसनीय है ?उन सभा के पंडितो के बीच में किसी ने गुलाब को और किसी ने कमल को अच्छा बताया. किसी ने गाय के दूध को और किसी ने बकरी के दूध को अच्छा बताया. किसी ने गन्ने के रस को और किसी ने शहद के मिठास की प्रसंशा की.

दूध किसका श्रेष्ठ है ? किसका मिठास अच्छा है ? कौन सा पत्ता अच्छा है ?  राजाओ में कौन प्रशंसनीय है ?उन सभा के पंडितो के बीच में किसी ने गुलाब को और किसी ने कमल को अच्छा बताया. किसी ने गाय के दूध को और किसी ने बकरी के दूध को अच्छा बताया. किसी ने गन्ने के रस को और किसी ने शहद के मिठास की प्रसंशा की.

पत्तो में किसी ने केले के पत्तो को और किसी ने नींबू के पेड़ के पत्तो को अच्छा बताया. उत्तम राजा के नाम का निर्देश करने में भी भिन्न-भिन्न मत थे. किसी ने अकबर को ही राजाओ में बुद्धिमान बताया. अकबर ने सबके उत्तरों को सुना. वहां बीरबल को चुप देखकर अकबर ने उनसे अपना मत बताने के लिए आदेश दिया.

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तब बीरबल बोला- राजन, फूल तो कपास का श्रेष्ठ है क्योंकि उससे वस्त्र बनाये जाते है. निर्धन लोग भी उन वस्त्रो से शरीर को ढकते है. दूध माता का ही अच्छा है क्योंकि उसके पोषक बच्चो के लिए और कुछ भी नहीं है. मिठास जीभ का ही प्रशंसनीय है जो दूसरो को भी वश में करता है.

 

पत्ता पान का ही प्रशंसनीय होता है क्योंकि उसे शत्रु को भी दिए जाने से वह मित्र हो जाये. राजाओ में इन्द्र श्रेष्ठ है क्योंकि उसकी कृपा से भूमि में जलवृष्टि होती है.

यह सब सुनकर सभी ने बीरबल के उत्तरों का अभिनन्दन किया. इसके बाद सम्राट अकबर ने बार-बार बीरबल की प्रशंसा की.

 

नैतिक कहानियाँ

                                      श्री गजराज

ये बाल नैतिक कहानियाँ श्री गजराज जी प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक केंद्रीय विद्यालय प्रथम पाली लखीमपुर – खीरी द्वारा बच्चों  के नैतिक विकास हेतु विश्व के समस्त बच्चों को समर्पित है. पुस्तकालय ब्लॉग सदैव उनका आभारी रहेगा .

नैतिक कथा : जीवन का मूल्य

यह कहानी पुराने समय की है। एक दिन एक आदमी गुरु के पास गया और उनसे कहा, ‘बताइए गुरुजी, जीवन का मूल्य क्या है?’
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गुरु ने उसे एक पत्थर दिया और कहा, ‘जा और इस पत्थर का मूल्य पता करके आ, लेकिन ध्यान रखना पत्थर को बेचना नहीं है।’
वह आदमी पत्थर को बाजार में एक संतरे वाले के पास लेकर गया और संतरे वाले को दिखाया और बोला, ‘बता इसकी कीमत क्या है?’
संतरे वाला चमकीले पत्थर को देखकर बोला, ’12 संतरे ले जा और इसे मुझे दे जा।’
वह आदमी संतरे वाले से बोला, ‘गुरु ने कहा है, इसे बेचना नहीं है।’
और आगे वह एक सब्जी वाले के पास गया और उसे पत्थर दिखाया। सब्जी वाले ने उस चमकीले पत्थर को देखा और कहा, ‘एक बोरी आलू ले जा और इस पत्थर को मेरे पास छोड़ जा।’

उस आदमी ने कहा, ‘मुझे इसे बेचना नहीं है, मेरे गुरु ने मना किया है।

आगे एक सोना बेचने वाले सुनार के पास वह गया और उसे पत्थरदिखाया।
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सुनार उस चमकीले पत्थर को देखकर बोला, ’50 लाख में बेच दे’।

उसने मना कर दिया तो सुनार बोला, ‘2 करोड़ में दे दे या बता इसकी कीमत जो मांगेगा, वह दूंगा तुझे…।’
उस आदमी ने सुनार से कहा, ‘मेरे गुरु ने इसे बेचने से मना किया है।’
आगे हीरे बेचने वाले एक जौहरी के पास वह गया और उसे पत्थर दिखाया।
जौहरी ने जब उस बेशकीमती रुबी को देखा तो पहले उसने रुबी के पास एक लाल कपड़ा बिछाया, फिर उस बेशकीमती रुबी की परिक्रमा लगाई, माथा टेका, फिर जौहरी बोला, ‘कहां से लाया है ये बेशकीमती रुबी? सारी कायनात, सारी दुनिया को बेचकर भी इसकी कीमत नहीं लगाई जा सकती। ये तो बेशकीमती है।’
वह आदमी हैरान-परेशान होकर सीधे गुरु के पास गया और अपनी आपबीती बताई और बोला, ‘अब बताओ गुरुजी, मानवीय जीवन का मूल्य क्या है?’

गुरु बोले, ‘तूने पहले पत्थर को संतरे वाले को दिखाया, उसने इसकी कीमत 12 संतरे बताई। आगे सब्जी वाले के पास गया, उसने इसकी कीमत 1 बोरी आलू बताई। आगे सुनार ने 2 करोड़ बताई और जौहरी ने इसे बेशकीमती बताया।  अब ऐसे ही तेरा मानवीय मूल्य है। इसे तू 12 संतरे में बेच दे या 1 बोरी आलू में या 2 करोड़ में या फिर इसे बेशकीमती बना ले, ये तेरी सोच पर निर्भर है कि तू जीवन को किस नजर से देखता है।’

सीख : हमें कभी भी अपनी सोच का दायरा कम नहीं होने देना चाहिए।                                धूर्त भेड़िया

ब्रह्मारण्य नामक एक बन था। उसमें कर्पूरतिलक नाम का एक बलशाली हाथी रहता था।देह में और शक्ति में सबसे बड़ा होने से बन में उसका बहुत रौब था। उसे देख सारे बाकी पशु प्राणी उससे दूर ही रहते थे।जब भी कर्पूरतिलक भूखा होता तो अपनी सूँड़ से पेड़की टहनी आराम से तोड़ता और पत्ते मज़े में खा लेता। तालाब के पास जा कर पानी पीता और पानी में बैठा रहता। एक तरह से वह उस वन का राजा ही था। कहे बिना सब पर उसका रौब था। वैसे ना वह किसी को परेशान करता था ना किसी के काम में दखल देता था फिर भी कुछ जानवर उससे जलते थे।जंगल के भेड़ियों को यह बातअच्छी नहीं लगती थी। उन सब ने मिलकर सोचा, “किसी तरह इस हाथी को सबक सिखाना चाहिये और इसे अपने रास्ते से हटा देना चाहिये। उसका इतना बड़ा शरीर है, उसे मार कर उसका मांस भी हम काफी दिनोंतक खा सकते हैं। लेकिन इतने बड़े हाथी को मारना कोई बच्चों का खेल नहीं। किसमें है यह हिम्मत जो इस हाथी को मार सके?”
उनमें से एक भेड़िया अपनी गर्दन ऊँची करके कहने लगा,”उससे लड़ाई करके तो मैं उसे नहीं मार सकता लेकिन मेरी बुद्धिमत्ता से मैं उसे जरूर मारने में कामयाब हो सकता हूँ।” जब यह बात बाकी भेड़ियों ने सुनी तो सब खुश हो गये। और सबने उसे अपनी करामत दिखाने की इज़ाज़त दे दी। 
     चतुर भेड़िया हाथी कर्पूरतिलक के पास गया और उसे प्रणाम किया। “प्रणाम! आपकी कृपा हम पर सदा बनाए रखिये।”कर्पूरतिलक ने पूछा, “कौन हो भाई तुम? कहाँ से आये हो? मैं तो तुम्हें नहीं जानता। मेरे पास किस काम सेआये हो?”
“महाराज! मैं एक भेड़िया हूँ। मुझे जंगल के सारे प्राणियों ने आपके पास भेजा है। जंगल का राजा ही सबकी

                                धूर्त भेड़िया-baal kahani 

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ब्रह्मारण्य नामक एक बन था। उसमें कर्पूरतिलक नाम का एक बलशाली हाथी रहता था।देह में और शक्ति में सबसे बड़ा होने से बन में उसका बहुत रौब था। उसे देख सारे बाकी पशु प्राणी उससे दूर ही रहते थे।जब भी कर्पूरतिलक भूखा होता तो अपनी सूँड़ से पेड़की टहनी आराम से तोड़ता और पत्ते मज़े में खा लेता। तालाब के पास जा कर पानी पीता और पानी में बैठा रहता। एक तरह से वह उस वन का राजा ही था। कहे बिना सब पर उसका रौब था। वैसे ना वह किसी को परेशान करता था ना किसी के काम में दखल देता था फिर भी कुछ जानवर उससे जलते थे।जंगल के भेड़ियों को यह बातअच्छी नहीं लगती थी। उन सब ने मिलकर सोचा, “किसी तरह इस हाथी को सबक सिखाना चाहिये और इसे अपने रास्ते से हटा देना चाहिये। उसका इतना बड़ा शरीर है, उसे मार कर उसका मांस भी हम काफी दिनोंतक खा सकते हैं। लेकिन इतने बड़े हाथी को मारना कोई बच्चों का खेल नहीं। किसमें है यह हिम्मत जो इस हाथी को मार सके?”
उनमें से एक भेड़िया अपनी गर्दन ऊँची करके कहने लगा,”उससे लड़ाई करके तो मैं उसे नहीं मार सकता लेकिन मेरी बुद्धिमत्ता से मैं उसे जरूर मारने में कामयाब हो सकता हूँ।” जब यह बात बाकी भेड़ियों ने सुनी तो सब खुश हो गये। और सबने उसे अपनी करामत दिखाने की इज़ाज़त दे दी। 
     चतुर भेड़िया हाथी कर्पूरतिलक के पास गया और उसे प्रणाम किया। “प्रणाम! आपकी कृपा हम पर सदा बनाए रखिये।”कर्पूरतिलक ने पूछा, “कौन हो भाई तुम? कहाँ से आये हो? मैं तो तुम्हें नहीं जानता। मेरे पास किस काम सेआये हो?”
“महाराज! मैं एक भेड़िया हूँ। मुझे जंगल के सारे प्राणियों ने आपके पास भेजा है। जंगल का राजा ही सबकी देखभाल करता है, उसीसे जंगल की शान होती है। लेकिन अफसोस की बात यह है कि अपने जंगल में कोई राजा ही नहीं।हम सब ने मिलकर सोचा कि आप जैसे बलवान को ही जंगल का राजा बनाना चाहिये। इसलिये राज्याभिषेक का मुहुर्त हमने निकाला है। यदि आपको कोई आपत्ति नहीं हो तो आप मेरे साथ चल सकते हैं और हमारे जंगल के राजा बन सकते हैं।
“ऐसी राजा बनने की बात सुनकर किसे खुशी नहीं होगी? कर्पूरतिलक भी खुश हो गया। अभी थोड़ी देर पहले तो मैं कुछ भी नहीं था और एकदम राजा बन जाऊँगा यह सोचकर उसने तुरन्त हामी भर दी। दोनो चल पडे। भेड़िया कहने लगा, “मुहुर्त का समय नज़दीक आ रहा है, जरा जल्दी चलना होगा हमें।”भेड़िया जोर जोर से भागने लगा और उसके पीछे कर्पूरतिलक भी जैसे बन पड़े, भागने की केाशिश में लगा रहा। बीच में एक तालाब आया। उस तालाब में ऊपर ऊपर तो पानी दिखता था। लेकिन नीचे काफी दलदल था। भेड़िया छोटा होने के कारण कूद कर तालाब को पार कर गया और पीछे मुड़कर देखने लगा कि कर्पूरतिलक कहाँ तक पहुँचा है।कर्पूरतिलक अपना भारी शरीर लेकर जैसे ही तालाब में जाने लगा तो दलदल में फंसताही चला गया। निकल न पाने के कारण  वह भेड़िये को आवाज़ लगा रहा था, “अरे! दोस्त, मुझे जरा मदद करोगे? मैं इस दलदल से निकल नहीं पा रहा हूँ।”लेकिन भेड़िये का ज़वाब तो अलग ही आया, “अरे! मूर्ख हाथी, मुझ जैसे भेड़िये पर तुमने यकीन तो किया लेकिन अब भुगतो और अपनी मौत की घड़ियाँ गिनते रहो, मैं तो चला!”यह कहकर भेड़िया खुशी से अपने साथियों को यह खुशखबरी देने के लिये दौड़ पड़ा।
बेचारा कर्पूरतिलक!
                             
  MORAL:      एकदमसे किसी पर यकीन ना करने में ही भलाई होती है।

मकड़ी का जाला -नैतिक कथा

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         एक मकड़ी थी. उसने आराम से रहने के लिए एक शानदार जाला बनाने का विचार किया और सोचा की इस जाले मे खूब कीड़ें, मक्खियाँ फसेंगी और मै उसे आहार बनाउंगी और मजे से रहूंगी .
      उसने कमरे के एक कोने को पसंद किया और वहाँ जाला बुनना शुरू किया. कुछ देर बाद आधा जाला बुन कर तैयार हो गया. यह देखकर वह मकड़ी काफी खुश हुई कि तभी अचानक उसकी नजर एक बिल्ली पर पड़ी जो उसे देखकर हँस रही थी.मकड़ी को गुस्सा आ गया और वह बिल्ली से बोली , ” हँस क्यो रही हो?
 “हँसू नही तो क्या करू.” , बिल्ली ने जवाब दिया , ” यहाँ मक्खियाँ नही है ये जगह तो बिलकुल साफ सुथरी है, यहाँ कौन आयेगा तेरे जाले मे.”ये बात मकड़ी के गले उतर गई. उसने अच्छी सलाह के लिये बिल्ली को धन्यवाद दिया और जाला अधूरा छोड़कर दूसरी जगह तलाश करने लगी.
      उसने ईधर ऊधर देखा. उसे एक खिड़की नजर आयी और फिर उसमे जाला बुनना शुरू किया कुछ देर तक वह जाला बुनती रही , तभी एक चिड़िया आयी और मकड़ी का मजाक उड़ाते हुए बोली , ” अरे मकड़ी , तू भी कितनी बेवकूफ है.”“क्यो ?”, मकड़ी ने पूछा.चिड़िया उसे समझाने लगी , ” अरे यहां तो खिड़की से तेज हवा आती है. यहा तो तू अपने जाले के साथ ही उड़ जायेगी.”मकड़ी को चिड़िया की बात ठीक लगीँ और वह वहाँ भी जाला अधूरा बना छोड़कर सोचने लगी अब कहाँ जाला बनायाँ जाये.
      समय काफी बीत चूका था और अब उसे भूख भी लगने लगी थी .अब उसेएक आलमारी का खुला दरवाजा दिखा और उसने उसी मे अपना जाला बुनना शुरू किया.
    कुछ जाला बुना ही था तभी उसे एक काक्रोच नजर आया जो जाले को अचरज भरे नजरो से देख रहा था.मकड़ी ने पूछा – ‘इस तरह क्यो देख रहे हो?’काक्रोच बोला-,” अरे यहाँ कहाँ जाला बुनने चली आयी ये तो बेकार की आलमारी है. अभी ये यहाँ पड़ी है कुछ दिनों बाद इसे बेच दिया जायेगा और तुम्हारी सारी मेहनत बेकार चली जायेगी. यह सुन कर मकड़ी ने वहां से हट जाना ही बेहतर समझा .
    बार-बार प्रयास करने से वह काफी थक चुकी थी और उसके अंदर जाला बुनने की ताकत ही नही बची थी. भूख की वजह से वह परेशान थी. उसे पछतावा हो रहा था कि अगर पहले ही जाला बुन लेती तो अच्छा रहता. पर अब वह कुछ नहीं कर सकती थी उसी हालत मे पड़ी रही.
  जब मकड़ी को लगा कि अब कुछ नहीं हो सकता है तो उसने पास से गुजर रही चींटी से मदद करने का आग्रह किया .चींटी बोली, ” मैं बहुत देर से तुम्हे देख रही थी , तुम बार- बार अपना काम शुरू करती और दूसरों के कहने पर उसे अधूरा छोड़ देती . और जो लोग ऐसा करते हैं , उनकी यही हालत होती है.” और ऐसा कहते हुए वह अपने रास्ते चली गई और मकड़ी पछताती हुई निढाल पड़ी रही.
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   MORAL:   हमारी ज़िन्दगी मे भी कई बार कुछ ऐसा ही होता है. हम कोई काम start करते है. शुरू -शुरू मे तो हम उस काम के लिये बड़े उत्साहित रहते है पर लोगो के comments की वजह से उत्साह कम होने लगता है और हम अपना काम बीच मे ही छोड़ देते है और जब बादमे पता चलता है कि हम अपने सफलता के कितने नजदीक थे तो बाद मे पछतावे के अलावा कुछ नही बचता.

विद्यार्थी पुस्तकालय पुस्तक – दल

बालक पुस्तकालय – दल

A. कृष्ण कान्त मिश्रा दल

1. कौस्तुभ  आर . शाक्य

2. अनुराग अवस्थी

3. आकाश यादव

4. धर्मेश कुमार

5 .  कुँवर वीर बहादुर प्रताप सिंह

6. अक्षांश पाण्डेय

 

B. अनुराग सिंह – दल

  1. अमन राज

2. आकाश वर्मा

3. अंश गुप्ता

4. सूर्य

C. आंजनेय बाजपेई

१. शिवांक पाण्डेय

2. देवांश मौर्य

3. वैभव सिंह

 

D. प्रशांत कुमार

  1. मोहित गुप्ता

2. आकाश वर्मा

3. उदय प्रताप

4. शुभम वर्मा

5. कृष्णा राज

 

1.

2.

3.

4.

5.

D. अनुदेश वर्मा

१. वैभव त्रिपाठी

2. अश्विन यश चौधरी

3. अहम् चौधरी

4.

5.

E.

1.

2.

3.

4.

 

बालिका पुस्तकालय दल

 

A. तनु भारती

१. शाम्भवी श्रीवास्तव

2. शिप्रा राज

3.3 नाज़िया साजिद

B. अर्पिता मिश्रा

१. अनुष्का श्रीवास्तव

2.वैष्णवी मिश्र

3. अपूर्वा कनोजिया

4.

C. विभूति यादव

  1. गार्गी तिवारी

2. अर्पिता सिंह

३ . प्रियांशी

D. अनन्या वर्मा

  1. सौम्या चौधरी
  2. कशिश वर्मा
  3. . वैदेही पाण्डेय
  4.  सत्या

 

 

 

 

 

 

 

पुस्तक – समीक्षा

पुस्तक – समीक्षा

शीर्षक : – पंचतंत्र की कहानियाँ

लेखक : – विष्णु शर्मा

प्रकाशक : – विकास पेपर बैक्स , नई दिल्ली

पृष्ठ : – 50

मूल्य : – 50.00 रूपये

 

                           इस पुस्तक की समीक्षा करते हुए हमें बहुत ख़ुशी हो रही है I हमने ध्यान से इस पुस्तक को पढ़ा और प्रत्येक  का कहानी का भरपूर आनन्द उठाया I  वास्तव में यह पुस्तक मनोरंजक , ज्ञानवर्धक एवम् प्रेरणादायक है I इस पुस्तक में मात्र दस कहनियाँ हैं I यहाँ पर हम ” प्यासा कौव्वा ” कहानी पर अपने विचारों को व्यक्त कर रहें हैं I  कहानी इस प्रकार है :- गर्मी की दोपहरी थी I एक ” प्यासा कौव्वा ” पानी की तलाश में इधर – उधर भटक रहा था I उसे कहीं पर भी पानी नहीं दिखाई दिया I काफी प्रयास करने पर उसे एक घड़ा दिखाई पड़ा I वह उस घड़े के पास गया और देखा कि घड़े में पानी बहुत कम था I उसकी चोंच पानी तक नहीं पहुँच सकी I पर उसने हिम्मत नहीं हारी I उसने काफी सोच – विचार किया I तभी उसके दिमाग में एक जानदार उपाय आया I उसने सोचा क्यों न इस घड़े में एक – एक करके कंकड़ों को डाला जाय तो पानी निश्चित ही उपर आयेगा I वह घड़े में तब तक कंकड़ डालता रहा जब तक की पानी उपर तक नहीं आ गया I अब कौव्वे को अपनी इस सफलता पर बड़ी ख़ुशी हुई I उसने पानी पी कर अपनी प्यास बुझाई I आपने देखा !  कौव्वे ने इस कठिन परिस्थितियों में भी हिम्मत और धैर्य से  काम लिया और शान्त दिमाग से पानी  उपर लाने पर विचार करता रहा I उसकी बुद्धि , धैर्य और मेहनत सफल हुई I

शिक्षा : – ” हमें विपत्ति में धर्य , बुद्धि और साहस से काम लेना चाहिए तभी हम कठिनाईयों पर विजय प्राप्त कर सकते हैं I “

अतः पुस्तक सबके लिये पठनीय एवम् संग्रहणीय है I

द्वारा : –

नाम : – अदिति सिंह

कक्षा : – सातवीं ( 2016 – 17 )

केन्द्रीय विद्यालय लखीमपुर – खीरी में स्वच्छ भारत अभियान की एक झलक

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KRISHAN GOPI

स्वच्छ विद्यालय हरित विद्यालय स्वस्थ बच्चे

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तिथि 02 अक्तूबर 2014
स्थान नई दिल्ली, भारत
जालस्थल आधिकारिक जालस्थल

स्वच्छ भारत अभियानभारत सरकार द्वारा आरम्भ किया गया राष्ट्रीय स्तर का अभियान है जिसका उद्देश्य गलियों, सड़कों तथा अधोसंरचना को साफ-सुथरा करना है। यह अभियान महात्मा गाँधी के जन्मदिवस ०२ अक्टूबर २०१४ को आरम्भ किया गया।महात्मा गांधी ने अपने आसपास के लोगों को स्वच्छता बनाए रखने संबंधी शिक्षा प्रदान कर राष्ट्र को एक उत्कृष्ट संदेश दिया था।

शहरी क्षेत्रों के लिए स्वच्छ भारत मिशन

मिशन का उद्देश्य 1.04 करोड़ परिवारों को लक्षित करते हुए 2.5 लाख समुदायिक शौचालय, 2.6 लाख सार्वजनिक शौचालय, और प्रत्येक शहर में एक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की सुविधा प्रदान करना है। इस कार्यक्रम के तहत आवासीय क्षेत्रों में जहाँ व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों का निर्माण करना मुश्किल है वहाँ सामुदायिक शौचालयों का निर्माण करना। पर्यटन स्थलों, बाजारों, बस स्टेशन, रेलवे स्टेशनों जैसे प्रमुख स्थानों पर भी सार्वजनिक शौचालय का निर्माण किया जाएगा। यह कार्यक्रम पाँच साल अवधि में 4401 शहरों में लागू किया जाएगा। कार्यक्रम पर खर्च किये जाने वाले 62,009 करोड़ रुपये में केंद्र सरकार की तरफ से 14623 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाएगें। केंद्र सरकार द्वारा प्राप्त होने वाले 14623 करोड़ रुपयों में से 7366 करोड़ रुपये ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर,4,165 करोड़ रुपये व्यक्तिगत घरेलू शौचालय पर,1828 करोड़ रुपये जनजागरूकता पर और समुदाय शौचालय बनवाये जाने पर 655 करोड़ रुपये खर्च किये जाएंगे। इस कार्यक्रम खुले में शौच, अस्वच्छ शौचालयों को फ्लश शौचालय में परिवर्तित करने, मैला ढ़ोने की प्रथा का उन्मूलन करने, नगरपालिका ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और स्वस्थ एवं स्वच्छता से जुड़ीं प्रथाओं के संबंध में लोगों के व्यवहार में परिवर्तन लाना आदि शामिल हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों के लिए स्वच्छ भारत मिशन

निर्मल भारत अभियान कार्यक्रम भारत सरकार द्वारा चलाया जा रहा ग्रामीण क्षेत्र में लोगों के लिए माँग आधारित एवं जन केन्द्रित अभियान है, जिसमें लोगों की स्वच्छता सम्बन्धी आदतों को बेहतर बनाना, स्व सुविधाओं की माँग उत्पन्न करना और स्वच्छता सुविधाओं को उपलब्ध करना, जिससे ग्रामीणों के जीवन स्तर को बेहतर बनाया जा सके।

अभियान का उद्देश्य पांच वर्षों में भारत को खुला शौच से मुक्त देश बनाना है। अभियान के तहत देश में लगभग 11 करोड़ 11 लाख शौचालयों के निर्माण के लिए एक लाख चौंतीस हज़ार करोड़ रुपए खर्च किये जाएंगे। बड़े पैमाने पर प्रौद्योगिकी का उपयोग कर ग्रामीण भारत में कचरे का इस्तेमाल उसे पूंजी का रूप देते हुए जैव उर्वरक और ऊर्जा के विभिन्न रूपों में परिवर्तित करने के लिए किया जाएगा। अभियान को युद्ध स्तर पर प्रारंभ कर ग्रामीण आबादी और स्कूल शिक्षकों और छात्रों के बड़े वर्गों के अलावा प्रत्येक स्तर पर इस प्रयास में देश भर की ग्रामीण पंचायत,पंचायत समिति और जिला परिषद को भी इससे जोड़ना है।

अभियान के एक भाग के रूप में प्रत्येक पारिवारिक इकाई के अंतर्गत व्यक्तिगत घरेलू शौचालय की इकाई लागत को 10,000 से बढ़ा कर 12,000 रुपये कर दिया गया है और इसमें हाथ धोने,शौचालय की सफाई एवं भंडारण को भी शामिल किया गया है। इस तरह के शौचालय के लिए सरकार की तरफ से मिलने वाली सहायता 9,000 रुपये और इसमें राज्य सरकार का योगदान 3000 रुपये होगा। जम्मू एवं कश्मीर एवं उत्तरपूर्व राज्यों एवं विशेष दर्जा प्राप्त राज्यों को मिलने वाली सहायता 10800 होगी जिसमें राज्य का योगदान 1200 रुपये होगा। अन्य स्रोतों से अतिरिक्त योगदान करने की स्वीकार्यता होगी।

स्वच्छ भारत स्वच्छ विद्यालय अभियान

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन स्वच्छ भारत-स्वच्छ विद्यालय अभियान केन्द्रीय 25 सितंबर, 2014 से 31 अक्टूबर 2014 के बीच केंद्रीय विद्यालयों और नवोदय विद्यालय संगठन में आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान की जाने वाली गतिविधियों में शामिल हैं-

  • स्कूल कक्षाओं के दौरान प्रतिदिन बच्चों के साथ सफाई और स्वच्छता के विभिन्न पहलुओं पर SBAविशेष रूप से महात्मा गांधी की स्वच्छता और अच्छे स्वास्थ्य से जुड़ीं शिक्षाओं के संबंध में बात करें।
  • कक्षा, प्रयोगशाला और पुस्तकालयों आदि की सफाई करना।
  • स्कूल में स्थापित किसी भी मूर्ति या स्कूल की स्थापना करने वाले व्यक्ति के योगदान के बारे में बात करना और इस मूर्तियों की सफाई करना।
  • शौचालयों और पीने के पानी वाले क्षेत्रों की सफाई करना।
  • रसोई और सामान ग्रह की सफाई करना।
  • खेल के मैदान की सफाई करना
  • स्कूल बगीचों का रखरखाव और सफाई करना।
  • स्कूल भवनों का वार्षिक रखरखाव रंगाई एवं पुताई के साथ।
  • निबंध,वाद-विवाद, चित्रकला, सफाई और स्वच्छता पर प्रतियोगिताओं का आयोजन।
  • ‘बाल मंत्रिमंडलों का निगरानी दल बनाना और सफाई अभियान की निगरानी करना।

इसके अलावा, फिल्म शो, स्वच्छता पर निबंध / पेंटिंग और अन्य प्रतियोगिताएं, नाटकों आदि के आयोजन द्वारा स्वच्छता एवं अच्छे स्वास्थ्य का संदेश प्रसारित करना। मंत्रालय ने इसके अलावा स्कूल के छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और समुदाय के सदस्यों को शामिल करते हुए सप्ताह में दो बार आधे घंटे सफाई अभियान शुरू करने का प्रस्ताव भी रखा है।

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झंडा ऊँचा रहे हमारा

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।
सदा शक्ति बरसाने वाला,
प्रेम सुधा सरसाने वाला
वीरों को हरषाने वाला
मातृभूमि का तन-मन सारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।
स्वतंत्रता के भीषण रण में,
लखकर जोश बढ़े क्षण-क्षण में,
काँपे शत्रु देखकर मन में,
मिट जावे भय संकट सारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।

इस झंडे के नीचे निर्भय,
हो स्वराज जनता का निश्चय,
बोलो भारत माता की जय,
स्वतंत्रता ही ध्येय हमारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।

आओ प्यारे वीरों आओ,
देश-जाति पर बलि-बलि जाओ,
एक साथ सब मिलकर गाओ,
प्यारा भारत देश हमारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।

इसकी शान न जाने पावे,
चाहे जान भले ही जावे,
विश्व-विजय करके दिखलावे,
तब होवे प्रण-पूर्ण हमारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।

– श्यामलाल गुप्त पार्षद

यह जानकारी कृष्ण गोपी कक्षा 7वीं  सत्र  2017 – 18 के द्वारा संग्रहित, संकलित  एवम् प्रकाशित किया गया  I

अभ्युक्ति : – शाबाश ! इसी तरह से नई – नई जानकारियों  द्वारा अपना एवम् देश की सेवा सदा करते रहना I

राजेश कुमार सिंह

पुस्त्कालायाध्यक्ष

 

frog hindi story

एकबार एक मेंढकों का समूह (Group of Frogs) जंगल की यात्रा पर निकला, सभी मेंढ़क (Frog) अपनी अपनी मस्ती में उछल कूदकर गुज़र रहे थे । रास्ते में एक गहरा गड्ढा था तो दो मेंढ़क मस्ती करते-करते गड्ढे में गिर गये और गड्ढे के बीच एक पत्थर पे लटक गए ।

अन्य मेंढकों ने यह देखा की गड्ढा बहुत गहरा है तो वे उन्हें कहने लगे कि इस गड्ढे से बाहर निकलना नामुमकिन है (Impossible to Get out of the pit), लेकिन फिर भी यह दोनों मेंढकों ने उनकी टिप्पणियों को नज़रअंदाज़ किया (Frogs Ignored the Comments) और दोनों गड्ढे से बाहर कूदने की कोशिश करने लगे ।

वो दो – तीन बार कूदे लेकिन फिर वापस गिर जाते थे तो यह देखकर ऊपर वाले सभी मेंढकों ने कहा कि आप चाहे कितनी भी कोशिश कर लो लेकिन इस गड्ढे से बाहर निकलना नामुमकिन है (It is Impossible) । इस फ़िजूल के दर्द से अच्छा है आप गड्ढे में गिरकर मर जाए, आख़िरकार एक मेंढ़क (Frog) ने बहार वाले मेंढकों की बात पर विश्वास कर प्रयास करना छोड़ दिया (Gave up) और गड्ढे में गिरकर मर गया ।

लेकिन दूसरे मेंढक (Frog) ने अपने पूरे जोश (Passion) से कूदना जारी रखा । एक बार फिर मेंढकों की भीड़ (Crowd of Frogs) ने उसे चिल्लाते हुए कहा कि तुम कभी बाहर नहीं निकल सकते और बार बार पत्थर पे गिरने से होनेवाले दर्द से अच्छा है की गड्ढे के अंदर गिरकर मर जाना ।

लेकिन उसने किसी की नहीं सुनी और वह और ज़ोर से कूदने लगा । वो जितनी ज़ोर से गिरता वो उतना ही जोश के साथ उठकर कूदता और आख़िरकार उसने कर दिखाया । वो एक बड़ी छलांग के साथ बाहर आ गिरा । सभी मेंढ़क उसे अचरज से देखते रह गए और एक मेंढ़क (Frog) ने उसे पूछा की हम सब तुम्हें मना कर रहे थे क्या तुमने यह नहीं सुना? वो मेंढ़क (Frog) सभी मेंढकों को आश्चर्य के साथ पूछने लगा क्या आप मना कर रहे थे? मुझे कम सुनाई देता है तो मैंने गड्ढे के अंदर कुछ सुना ही नहीं उल्टा मुझे तो ऐसा लग रहा था की आप लोग मुझे उस समय प्रोत्साहित (Encourage) कर रहे थे ।

— : Moral :–

चाहे आप कितनी भी बड़ी मुश्किल में फँस गए हो (Get Stuck in Problem) लेकिन कभी अपने आप पर से विश्वास (Self Belief) न खो ना, कभी हार न मानना (Never Give up) और अपनी आखिरी साँस तक लड़ते रहना (Keep Fighting Until Death) फिर किसी मुश्किलों की औकात नहीं की वो आपको ज्यादा देर तक परेशान कर सके ।

शब्दों में बड़ी ताकत होती है । संघर्ष (Struggle) करे रहे किसी व्यक्ति के लिए आपके प्रोत्साहन (Encourage) करनेवाले शब्द उसे बढ़ावा (Courage) दे सकते है और उसे ऊपर उठा सकते हैं । तो आप हमेशा सावधान रहे कि आप क्या कह रहे हैं । किसी को भी नकारात्मक टिप्पणी (Negative Comment) दे कर उसका हौसला (Courage) न तोड़ना, किसी की आशा पे चोट मत करना (Do Not Break Anyone’s Hope) ।

हमेशा मुसीबत से गुज़र रहे व्यक्ति के लिए उत्साहवर्द्धक (Encouraging) शब्द ही कहे क्योंकि इससे उनमें मुश्किलों से लड़ने की हिम्मत (Dare to Fight against Problem) आएगी और एक सकारात्मक सोच (Positive Thinking) के साथ नई आशा का संचार होने से वे हिम्मत के साथ उठ खड़े होंगे और सभी मुश्किलों से पार पा लेंगे (वो Comment के माध्यम से जरुर जरुर बताइय

 

STUDENT’S LIBRARY BOOK’S MARKS STATEMENTS OF TEAM LEADERS AND THEIR TEAMS

A.   KRISHAN GOPI GROUP                   MARK’S STATEMENT

  1. KRISHNA GOPI                                            50/50
  2. RUDRA                                                           48/50
  3. SUMIT                                                            45/50
  4. UDAY SINGH                                                 45/50
  5. AMAN  PAL                                                    47/50
  6. ARPIT VERMA                                               46/50

TOTAL MARKS                                                      281/300

B. UDAY GROUP                                        MARK’S STATEMENT                                          1. UDAY PRATP KANAUJIYA                         49/50

2.SURYAKANT                                                     45/50

3.SUDEEP SINGH                                                46/50

4.APOORV VERMA                                             47/50

5. INDRASH JAYAWAL                                       50/50

TOTAL MARKS                                                  237/250

 C.  UTKARSH GROUP                                 MARK’S STATEMENT    

1. UTKARSH DIXIT                                                    48/50

2.AMAN SHARMA                                                        46/50

3.UTKARSH MISHRA                                                   49/50

4.DEVASH MISHRA                                                      44/50

5.DIVASH  RAJ                                                               46/50

6.ROHAN PRAKASH                                                     48/50

TOTAL MARKS                                                            281/300

D.  PARTH PANDEY GROUP                     MARK’S STATEMENT      

  1. PARTH PANDEY                                            47/50
  2. ABHAY AWASTHI                                           48/50
  3. ADARSH KUMAR                                            46/50
  4. VISHAL RAJ                                                      47/50
  5. SUCHIT SINGH                                                 47/50
  6. KRISH VERMA                                                  49/50

TOTAL MARKS                                                          284/300

   E.   PRASENJEET GROUP                      MARK’S STATEMENT    

  1. PRASENJEET SINGH                                        48/50
  2. SHUBHAM RAJ                                                    46/50
  3. SIDDHARATH VERMA                                       48/50
  4. SOURABH                                                             47/50
  5. AKASH PANDEY                                                  46/50
  6. ASUTHOSH MISHRA                                          45/50

TOTAL MARKS                                                            280/300

F.    NABILA  GROUP                       MARK’S STATEMENT  

  1. KM. NABILA AMAN                                      47/50
  2. KM. ZAHRA SIDDIQUI                                   46/50
  3. KM. ANANDI SINGH                                      48/50
  4. KM. AKSHARA GUPTA                                   45/50
  5. KM. TANISHA VISHNOI                                 47/50

TOTAL MARKS                                                        233/250

G.   ATULYA SAXENA GROUP                MARK’S STATEMENT                                          1. KM. ATULYA SAXENA                                     50/50

2. KM. SHIVANI                                                        47/50

3. KM. NASHRA                                                        45/50

4. KM. ANANYA  KASHYAP                                     48/50

5. KM. NAINIKA MISHRA                                       48/50

TOTAL MARKS                                                        238/250

H.   AMBIKA SRIVASTAVA GROUP         MARK STATEMENT                                            1. KM. AMBIKA SRIVASTAVA                            50/50

2. KM. ANHA ISLAM                                              49/50

3. KM. MERYAM IKRA                                           47/50

4. KM. SWATI                                                          48/50

TOTL MARKS                                                        194/200

 I.  DRASHTI SINGH GROUP             MARK’S STATEMENTS                                               1.KM. DRASHTI SINGH                                        49/50

2. KM. SAUMYA SINGH                                          49/50

3. KM. SNEHA SINGH                                             49/50

4. KM. ANANYA PANDEY                                        45/50

TOTAL MARKS                                                        192/200

 

POSITION OF GROUP LEADEARS         MARKS OBTAINED     POSITION     % OF MARKS

1.  AMBIKA GROUP                                               194/200                 1ST                         97

2. DRASHTI GROUP                                               192/200                 2ND                        96

3. ATULYA GROUP                                                  238/250                 3RD                        95.2

4. UDAY PRATAP  GROUP                                       237/250                4TH                      94.8

5. PARTH GROUP                                                    284/300                  5TH                     94.66

6. KRISHNA GOPI GROUP                                    281/300                   6TH                     93.66

7. UTKARSH DIXIT GROUP                                   281/300                  6TH                     93.66

8. PRASENJEET GROUP                                          280/300                 7TH                      93.33

 

 

DEAR CHILDREN BELIEVE IN UNITY AND WORK TOGETHER WITH YOUR TEAM LEADERS . YOUR TRUST AND CO-OPERATION WITH EVERY MEMBER OF TEAM WILL DEFINITELY IMPROVE YOUR ABILITIES AND QUALITIES AS WELL AS YOUR ENTIRE GROUP . YOUR ULTIMATE GOALS OR DESTINIES ARE TO BE QUALITATIVE AND QUANTITATIVE . LASTLY EVERY ONE OF YOU HAVE TO BE SURVIVE FOR YOUR LIVINGS, AND EARNING COMES THROUGH THE ABILITIES AND CAPABILITIES MODIFIED AND SHARPENED BY KNOWLEDGE AND AND EXPERIENCES . SO GAIN THE KNOWLEDGE AND APPLIED IN YOUR LIVES .

 

BY : – R.K.SINGH

LIBRARIAN