पुस्तक – समीक्षा

शीर्षक :-नंदन मार्च २०१३

लेखक :- शशी शेखर

प्रकाशक :- हिंदुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड, नई दिल्ली

पृष्ठ :- ६५

मूल्य :- रुपये २०.००

 

       हमें इस पुस्तक की समीक्षा करते बड़ी ख़ुशी हो रही है.इस पुस्तक में कुल २५ कहानियाँ हैं. वास्तव में यह पुस्तक मनोरंजक, ज्ञानवर्धक एवम प्रेरणादायक है. यहाँ  पर हम  “पिचकारी” कहानी पर अपने विचारों को  व्यक्त करना चाहते हैं. कहानी इस प्रकार है ;- होली का दिन था.  सभी जानवर टोलियाँ बनाकर रंग खेल रहे थे. वे एक-दूसरे पर पिचकारी से रंग फेक रहे थे. सभी मस्ती में थे. कोई ढोल तो कोई डफली बजा रहा था. होली के रंगो से आसमान भी रंग-बिरंगा हो गया था. लेकिन रामू हाथी वहाँ पर दिखाई नहीं दे रहा था. उसके न होने से सभी को होली खेलने में मजा नहीं आ रहा था.सबने मोनू बन्दर से कहा- जरा रामू हाथी का पता तो लगाओ कि वह कहाँ है. मोनू बन्दर ने देखा रामू हाथी अपने घर में उदास बैठा हुआ था. उसने रामू हाथी से पूछा कि इस बार होली खेलने का इरादा है या नहीं . रंग – चौराहे पर सभी तुम्हारा इंतजार कर रहें हैं. रामू हाथी ने कहा – कैसे होली खेलूं ? मेरे पास पैसे भी नहीं हैं.मेरी सारी फसल चोरी हो गए.मेरे पास रंग और पिचकारी खरीदने के लिए पैसे भी नहीं हैं. अगर होली खेलने खाली हाथ गया तो मुझे बड़ी शर्मिंदगी होगी. सभी जानवर मेरा मजाक उड़ाएंगे. वह उदास होकर बोला. इसमें मजाक कि क्या बात है ? मेरे पास ढेर सारे रंग पड़े हुए हैं. मेरे साथ रंग-चौक चलो. वहीँ पर पिचकारी भी मिल जाएगी. अपने मित्र कि बात मानकर रामू हाथी होली खेलने चला गया. जानवरों ने जैसे ही रामू हाथी को आता हुआ देखा तो ख़ुशी से चिल्लाने लगे. पास आने पर सभी ने रामू हाथी को रंगो से भिगो दिया. फिर रामू को मोनू बन्दर अपने घर ले गया. वहाँ बहुत सारा रंग घुला पड़ा  था. वह बोला – दादा – अपने पिचकारी में रंग भर लो. रामू ने कहा – मेरे पास पिचकारी नहीं है. मोनू बन्दर – बोला – दादा – तुम्हारी लम्बी सुड ही तुम्हारी पिचकारी है. इसमें रंग भर लो और सारे जानवरों पर उड़ेल दो. रामू हाथी को मोनू बन्दर कि बात समझ में आ गई . उसने अपने सूँड में रंग भर लिया और सभी जानवरों को  रंग से सराबोर कर दिया.  अब सभी जानवर रंग-बिरंगे दिखने लगे. रामू हाथी बोला मेरे पास सचमुच सबसे बड़ी पिचकारी है. अब मुझे कभी भी बाजार से पिचकारी नहीं  खरीदनी पड़ेगी. होली खेल कर रामू हाथी का मन खुशियों से भर गया .

 

शिक्षा- ” जानवरों के पास भी बुद्धि होती है.” उन्हें मुर्ख समझना  हमारी हमारी भूल है .

 

द्वार : – अमन

कक्षा : – ७

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