पालीबैग को ना-ना भईया : कविता

पालीबैग को ना-ना भईया

तक – बक  तक – बक  ता-ता थैय्या .

पालीबैग को ना-ना भैय्या .

तक – बक तक – बक  ता-ता थैय्या .

पालीबैग को ना-ना भैय्या .

लेकिन क्यों ?

पालीबैग जो खाएगी तो गाय मार जायगी .

मम्मी दूध हमारे घर में ,

फिर कहाँ से लाएगी ?

तब गलियों में पानी होगा .

जब गटर बंद हो जायेंगे.

हम छोटे-छोटे बच्चे हैं ,

कैसे स्कूल को जायेंगे .

और क्या होगा ?

खेतों के नन्हे पौधे भी ,

फिर साँस नहीं ले पाएंगे .

सब्जी मँहगी हो जाएगी ,

फल थोड़े से आएंगे .

सारे बच्चे मिलकर –

हम छोटे बच्चों की मानो ,

थैला ले कर जाओ .

या बाजार से कागज के  ,

थैले में सौदा लाओ .

पाली बैग नहीं भैय्या ,

कागज का थैला देना .

अपनी धरती साफ रखेंगे ,

मिलकर  बोलो है ना !

कवि :- अज्ञात                   संकलनकर्त्री :- कु. रतिका पुरी

कक्षा :- १०

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