केन्द्रीय विद्यालय लखीमपुर – खीरी में स्वच्छ भारत अभियान की एक झलक

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KRISHAN GOPI

स्वच्छ विद्यालय हरित विद्यालय स्वस्थ बच्चे

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तिथि 02 अक्तूबर 2014
स्थान नई दिल्ली, भारत
जालस्थल आधिकारिक जालस्थल

स्वच्छ भारत अभियानभारत सरकार द्वारा आरम्भ किया गया राष्ट्रीय स्तर का अभियान है जिसका उद्देश्य गलियों, सड़कों तथा अधोसंरचना को साफ-सुथरा करना है। यह अभियान महात्मा गाँधी के जन्मदिवस ०२ अक्टूबर २०१४ को आरम्भ किया गया।महात्मा गांधी ने अपने आसपास के लोगों को स्वच्छता बनाए रखने संबंधी शिक्षा प्रदान कर राष्ट्र को एक उत्कृष्ट संदेश दिया था।

शहरी क्षेत्रों के लिए स्वच्छ भारत मिशन

मिशन का उद्देश्य 1.04 करोड़ परिवारों को लक्षित करते हुए 2.5 लाख समुदायिक शौचालय, 2.6 लाख सार्वजनिक शौचालय, और प्रत्येक शहर में एक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की सुविधा प्रदान करना है। इस कार्यक्रम के तहत आवासीय क्षेत्रों में जहाँ व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों का निर्माण करना मुश्किल है वहाँ सामुदायिक शौचालयों का निर्माण करना। पर्यटन स्थलों, बाजारों, बस स्टेशन, रेलवे स्टेशनों जैसे प्रमुख स्थानों पर भी सार्वजनिक शौचालय का निर्माण किया जाएगा। यह कार्यक्रम पाँच साल अवधि में 4401 शहरों में लागू किया जाएगा। कार्यक्रम पर खर्च किये जाने वाले 62,009 करोड़ रुपये में केंद्र सरकार की तरफ से 14623 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाएगें। केंद्र सरकार द्वारा प्राप्त होने वाले 14623 करोड़ रुपयों में से 7366 करोड़ रुपये ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर,4,165 करोड़ रुपये व्यक्तिगत घरेलू शौचालय पर,1828 करोड़ रुपये जनजागरूकता पर और समुदाय शौचालय बनवाये जाने पर 655 करोड़ रुपये खर्च किये जाएंगे। इस कार्यक्रम खुले में शौच, अस्वच्छ शौचालयों को फ्लश शौचालय में परिवर्तित करने, मैला ढ़ोने की प्रथा का उन्मूलन करने, नगरपालिका ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और स्वस्थ एवं स्वच्छता से जुड़ीं प्रथाओं के संबंध में लोगों के व्यवहार में परिवर्तन लाना आदि शामिल हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों के लिए स्वच्छ भारत मिशन

निर्मल भारत अभियान कार्यक्रम भारत सरकार द्वारा चलाया जा रहा ग्रामीण क्षेत्र में लोगों के लिए माँग आधारित एवं जन केन्द्रित अभियान है, जिसमें लोगों की स्वच्छता सम्बन्धी आदतों को बेहतर बनाना, स्व सुविधाओं की माँग उत्पन्न करना और स्वच्छता सुविधाओं को उपलब्ध करना, जिससे ग्रामीणों के जीवन स्तर को बेहतर बनाया जा सके।

अभियान का उद्देश्य पांच वर्षों में भारत को खुला शौच से मुक्त देश बनाना है। अभियान के तहत देश में लगभग 11 करोड़ 11 लाख शौचालयों के निर्माण के लिए एक लाख चौंतीस हज़ार करोड़ रुपए खर्च किये जाएंगे। बड़े पैमाने पर प्रौद्योगिकी का उपयोग कर ग्रामीण भारत में कचरे का इस्तेमाल उसे पूंजी का रूप देते हुए जैव उर्वरक और ऊर्जा के विभिन्न रूपों में परिवर्तित करने के लिए किया जाएगा। अभियान को युद्ध स्तर पर प्रारंभ कर ग्रामीण आबादी और स्कूल शिक्षकों और छात्रों के बड़े वर्गों के अलावा प्रत्येक स्तर पर इस प्रयास में देश भर की ग्रामीण पंचायत,पंचायत समिति और जिला परिषद को भी इससे जोड़ना है।

अभियान के एक भाग के रूप में प्रत्येक पारिवारिक इकाई के अंतर्गत व्यक्तिगत घरेलू शौचालय की इकाई लागत को 10,000 से बढ़ा कर 12,000 रुपये कर दिया गया है और इसमें हाथ धोने,शौचालय की सफाई एवं भंडारण को भी शामिल किया गया है। इस तरह के शौचालय के लिए सरकार की तरफ से मिलने वाली सहायता 9,000 रुपये और इसमें राज्य सरकार का योगदान 3000 रुपये होगा। जम्मू एवं कश्मीर एवं उत्तरपूर्व राज्यों एवं विशेष दर्जा प्राप्त राज्यों को मिलने वाली सहायता 10800 होगी जिसमें राज्य का योगदान 1200 रुपये होगा। अन्य स्रोतों से अतिरिक्त योगदान करने की स्वीकार्यता होगी।

स्वच्छ भारत स्वच्छ विद्यालय अभियान

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन स्वच्छ भारत-स्वच्छ विद्यालय अभियान केन्द्रीय 25 सितंबर, 2014 से 31 अक्टूबर 2014 के बीच केंद्रीय विद्यालयों और नवोदय विद्यालय संगठन में आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान की जाने वाली गतिविधियों में शामिल हैं-

  • स्कूल कक्षाओं के दौरान प्रतिदिन बच्चों के साथ सफाई और स्वच्छता के विभिन्न पहलुओं पर SBAविशेष रूप से महात्मा गांधी की स्वच्छता और अच्छे स्वास्थ्य से जुड़ीं शिक्षाओं के संबंध में बात करें।
  • कक्षा, प्रयोगशाला और पुस्तकालयों आदि की सफाई करना।
  • स्कूल में स्थापित किसी भी मूर्ति या स्कूल की स्थापना करने वाले व्यक्ति के योगदान के बारे में बात करना और इस मूर्तियों की सफाई करना।
  • शौचालयों और पीने के पानी वाले क्षेत्रों की सफाई करना।
  • रसोई और सामान ग्रह की सफाई करना।
  • खेल के मैदान की सफाई करना
  • स्कूल बगीचों का रखरखाव और सफाई करना।
  • स्कूल भवनों का वार्षिक रखरखाव रंगाई एवं पुताई के साथ।
  • निबंध,वाद-विवाद, चित्रकला, सफाई और स्वच्छता पर प्रतियोगिताओं का आयोजन।
  • ‘बाल मंत्रिमंडलों का निगरानी दल बनाना और सफाई अभियान की निगरानी करना।

इसके अलावा, फिल्म शो, स्वच्छता पर निबंध / पेंटिंग और अन्य प्रतियोगिताएं, नाटकों आदि के आयोजन द्वारा स्वच्छता एवं अच्छे स्वास्थ्य का संदेश प्रसारित करना। मंत्रालय ने इसके अलावा स्कूल के छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और समुदाय के सदस्यों को शामिल करते हुए सप्ताह में दो बार आधे घंटे सफाई अभियान शुरू करने का प्रस्ताव भी रखा है।

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झंडा ऊँचा रहे हमारा

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।
सदा शक्ति बरसाने वाला,
प्रेम सुधा सरसाने वाला
वीरों को हरषाने वाला
मातृभूमि का तन-मन सारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।
स्वतंत्रता के भीषण रण में,
लखकर जोश बढ़े क्षण-क्षण में,
काँपे शत्रु देखकर मन में,
मिट जावे भय संकट सारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।

इस झंडे के नीचे निर्भय,
हो स्वराज जनता का निश्चय,
बोलो भारत माता की जय,
स्वतंत्रता ही ध्येय हमारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।

आओ प्यारे वीरों आओ,
देश-जाति पर बलि-बलि जाओ,
एक साथ सब मिलकर गाओ,
प्यारा भारत देश हमारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।

इसकी शान न जाने पावे,
चाहे जान भले ही जावे,
विश्व-विजय करके दिखलावे,
तब होवे प्रण-पूर्ण हमारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।

– श्यामलाल गुप्त पार्षद

यह जानकारी कृष्ण गोपी कक्षा 7वीं  सत्र  2017 – 18 के द्वारा संग्रहित, संकलित  एवम् प्रकाशित किया गया  I

अभ्युक्ति : – शाबाश ! इसी तरह से नई – नई जानकारियों  द्वारा अपना एवम् देश की सेवा सदा करते रहना I

राजेश कुमार सिंह

पुस्त्कालायाध्यक्ष

 

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एकबार एक मेंढकों का समूह (Group of Frogs) जंगल की यात्रा पर निकला, सभी मेंढ़क (Frog) अपनी अपनी मस्ती में उछल कूदकर गुज़र रहे थे । रास्ते में एक गहरा गड्ढा था तो दो मेंढ़क मस्ती करते-करते गड्ढे में गिर गये और गड्ढे के बीच एक पत्थर पे लटक गए ।

अन्य मेंढकों ने यह देखा की गड्ढा बहुत गहरा है तो वे उन्हें कहने लगे कि इस गड्ढे से बाहर निकलना नामुमकिन है (Impossible to Get out of the pit), लेकिन फिर भी यह दोनों मेंढकों ने उनकी टिप्पणियों को नज़रअंदाज़ किया (Frogs Ignored the Comments) और दोनों गड्ढे से बाहर कूदने की कोशिश करने लगे ।

वो दो – तीन बार कूदे लेकिन फिर वापस गिर जाते थे तो यह देखकर ऊपर वाले सभी मेंढकों ने कहा कि आप चाहे कितनी भी कोशिश कर लो लेकिन इस गड्ढे से बाहर निकलना नामुमकिन है (It is Impossible) । इस फ़िजूल के दर्द से अच्छा है आप गड्ढे में गिरकर मर जाए, आख़िरकार एक मेंढ़क (Frog) ने बहार वाले मेंढकों की बात पर विश्वास कर प्रयास करना छोड़ दिया (Gave up) और गड्ढे में गिरकर मर गया ।

लेकिन दूसरे मेंढक (Frog) ने अपने पूरे जोश (Passion) से कूदना जारी रखा । एक बार फिर मेंढकों की भीड़ (Crowd of Frogs) ने उसे चिल्लाते हुए कहा कि तुम कभी बाहर नहीं निकल सकते और बार बार पत्थर पे गिरने से होनेवाले दर्द से अच्छा है की गड्ढे के अंदर गिरकर मर जाना ।

लेकिन उसने किसी की नहीं सुनी और वह और ज़ोर से कूदने लगा । वो जितनी ज़ोर से गिरता वो उतना ही जोश के साथ उठकर कूदता और आख़िरकार उसने कर दिखाया । वो एक बड़ी छलांग के साथ बाहर आ गिरा । सभी मेंढ़क उसे अचरज से देखते रह गए और एक मेंढ़क (Frog) ने उसे पूछा की हम सब तुम्हें मना कर रहे थे क्या तुमने यह नहीं सुना? वो मेंढ़क (Frog) सभी मेंढकों को आश्चर्य के साथ पूछने लगा क्या आप मना कर रहे थे? मुझे कम सुनाई देता है तो मैंने गड्ढे के अंदर कुछ सुना ही नहीं उल्टा मुझे तो ऐसा लग रहा था की आप लोग मुझे उस समय प्रोत्साहित (Encourage) कर रहे थे ।

— : Moral :–

चाहे आप कितनी भी बड़ी मुश्किल में फँस गए हो (Get Stuck in Problem) लेकिन कभी अपने आप पर से विश्वास (Self Belief) न खो ना, कभी हार न मानना (Never Give up) और अपनी आखिरी साँस तक लड़ते रहना (Keep Fighting Until Death) फिर किसी मुश्किलों की औकात नहीं की वो आपको ज्यादा देर तक परेशान कर सके ।

शब्दों में बड़ी ताकत होती है । संघर्ष (Struggle) करे रहे किसी व्यक्ति के लिए आपके प्रोत्साहन (Encourage) करनेवाले शब्द उसे बढ़ावा (Courage) दे सकते है और उसे ऊपर उठा सकते हैं । तो आप हमेशा सावधान रहे कि आप क्या कह रहे हैं । किसी को भी नकारात्मक टिप्पणी (Negative Comment) दे कर उसका हौसला (Courage) न तोड़ना, किसी की आशा पे चोट मत करना (Do Not Break Anyone’s Hope) ।

हमेशा मुसीबत से गुज़र रहे व्यक्ति के लिए उत्साहवर्द्धक (Encouraging) शब्द ही कहे क्योंकि इससे उनमें मुश्किलों से लड़ने की हिम्मत (Dare to Fight against Problem) आएगी और एक सकारात्मक सोच (Positive Thinking) के साथ नई आशा का संचार होने से वे हिम्मत के साथ उठ खड़े होंगे और सभी मुश्किलों से पार पा लेंगे (वो Comment के माध्यम से जरुर जरुर बताइय

 

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