प्रेरणादायक कहानियाँ

पंचतंत्र की पांच प्रसिद्ध कहानियाँ

दोस्तों ! आपने बचपन में पंचतंत्र की कहानियाँ जरुर पढ़ी होगी. मैंने तो बहुत पढ़ी, मैं बचपन में बहुत कहानियाँ पढ़ता था. जो Knowledge देने के साथ – साथ मेरा मनोरंजन भी करती थी. आज मैं आपके साथ अपने बचपन की पंचतंत्र की 5 प्रसिद्ध कहानियाँ शेयर कर रहा हूँ जो मुझे बहुत पसंद है. इन कहानियों को पढने से न सिर्फ आपको मजा आएगा बल्कि आपको ज्ञान भी मिलेगा.

Best 5 panchatantra Stories In HIndi पंचतंत्र की पांच प्रसिद्ध कहानियाँ

Story No. 1 – पानी और प्यासा कौआ (A Thirsty crow)

Best 5 panchatantra Stories In HIndi पंचतंत्र की पांच प्रसिद्ध कहानियाँ

गर्मियों के दिन थे. दोपहर के समय बहुत ही सख्त गर्मी पड़ रही थी. एक कौआ पानी की तलाश में इधर – उधर भटक रहा था. लेकिन उसे कही भी पानी नहीं मिला. अंत में वह थका हुआ एक बाग में पहुँचा. वह पेड़ की शाखा पर बैठा हुआ था की अचानक उसकी नजर वृक्ष के नीचे पड़े एक घड़े पर गई. वह उड़कर घड़े के पास चला गया.

वहां उसने देखा कि घड़े में थोड़ा पानी है. वह पानी पीने के लिए नीचे झुका लेकिन उसकी चोंच पानी तक न पहुँच सकी. ऐसा इसलिए हो रहा था क्योंकि घड़े में पानी बहुत कम था.

परन्तु वह कौआ हताश नहीं हुआ बल्कि पानी पीने के लिए उपाय सोचने लगा. तभी उसे एक उपाय सूझा. उसने आस – पास बिखरे हुए कंकर उठाकर घड़े में डालने शुरू कर दिए. लगातार पानी में कंकड़ डालने से पानी ऊपर आ गया. फिर उसने आराम से पानी पिया और उड़ गया.

इस कहानी से शिक्षा :

दोस्तों जहाँ चाह होती है वहीँ राह होती है. कौवे को पानी की बहुत ज्यादा प्यास लगी थी. उसे पानी की बहुत आवश्यकता थी. जब उसे घड़े में पानी मिला तो वह Idea ढूंढने लगा और पानी पीने में मे कामयाब भी हुआ. हमें भी इस कहानी से यह जरुर सीखना चाहिए कि अगर हमें भी कुछ पाना है या हमें भी सफल होना है तो पहले हमारे अन्दर यह सोच आनी चाहिए की हमें भी सफल होना है.

अगर हम सफल होने के लिए अपने कदम बढ़ाएंगे तो हमें सफलता प्राप्त करने के रास्ते आसानी से मिलने लगेंगे. जहाँ चाह वहां राह और आवश्यकता ही हमेशा अविष्कार की जननी होती है.

Story No. 2 – एक चालाक लोमड़ी (A Clever Fox)

एक लोमड़ी बहुत भूखी थी. वह अपनी भूख मिटने के लिए भोजन की खोज में इधर – उधर घूमने लगी. जब उसे सारे जंगल में भटकने के बाद भी कुछ न मिला तो वह गर्मी और भूख से परेशान होकर एक पेड़ के नीचे बैठ गई. अचानक उसकी नजर ऊपर गई. पेड़ पर एक कौआ बैठा हुआ था. उसके मुंह में रोटी का एक टुकड़ा था. कौवे को देखकर लोमड़ी के मुँह में पानी भर आया. वह कौवे से रोटी छीनने का उपाय सोचने लगी.

तभी उसने कौवे को कहा, ” क्यों भई कौआ भैया ! सुना है तुम गीत बहुत अच्छे गाते हो. क्या मुझे गीत नहीं सुनाओगे ?. कौआ अपनी प्रशंसा को सुनकर बहुत खुश हुआ. वह लोमड़ी की बातो में आ गया. गाना गाने के लिए उसने जैसे ही अपना मुँह खोला, रोटी का टुकड़ा नीचे गिर गया. लोमड़ी ने झट से वह टुकड़ा उठाया और वहां से भाग गई. अब कौआ अपनी मूर्खता पर पछताने लगा.

इस कहानी से शिक्षा :

यह छोटी कहानी हमें स्पष्ट सन्देश देती है की कभी भी हो अपनी झूठी प्रशंसा से हमें बचना चाहिए. कई बार हमारी Life में हमें कई ऐसे लोग मिलते है जो हमसे अपना Important काम निकालने के लिए हमारी झूठी तारीफ़ करते है. एक बार जब वे हमसे अपना काम निकाल लेते है तो उसके बाद फिर हमें पूछते भी नहीं. इसलिए हमेशा झूठी प्रसंशा से बचे.

Story No. 3 – दो बिल्लियाँ और बन्दर ( Two cats and a monkey)

एक नगर में दो बिल्लियाँ रहती थी. एक दिन उन्हें रोटी का एक टुकड़ा मिला. वे दोनों आपस में लड़ने लगी. वे उस रोटी के टुकड़े को दो समान भागों में बाँटना चाहती थी लेकिन उन्हें कोई ढंग नहीं मिल पाया.

उसी समय एक बन्दर उधर से निकल रहा था. वह बहुत ही चालाक था. उसने बिल्लियों से लड़ने का कारण पूछा. बिल्लियों ने उसे सारी बात सुनाई. वह तराजू ले आया और बोला, ” लाओ, मैं तुम्हारी रोटी को बराबर बाँट देता हूँ. उसने रोटी के दो टुकड़े लेकर एक – एक पलड़े में रख दिए. वह बन्दर तराजू में जब रोटी को तोलता तो जिस पलड़े में रोटी अधिक होती, बन्दर उसे थोड़ी – सी तोड़ कर खा लेता.

इस प्रकार थोड़ी – सी रोटी रह गई. बिल्लियों ने अपनी रोटी वापस मांगी. लेकिन बन्दर ने शेष बची रोटी भी मुँह में डाल ली. फिर बिल्लियाँ उसका मुँह देखती रह गई.

इस कहानी से शिक्षा :

बचपन से आपने सुना होगा की कभी भी हमें आपस में लड़ना नहीं चाहिए. कोई भी दोस्त या परिवार तब तक बहुत मजबूत होता है, जब तक उनमे आपसी प्यार और विश्वास होता है.

एक बार जब वह आपस में लड़ने लग जाते है तो इससे दूसरे लोग भी फायदा उठाते है. वह इस लड़ाई को बड़ा बनाकर अपना मुनाफा ढूंढ लेते है. इसलिए लड़ने से अच्छा है एक साथ रहना. किसी भी Problem या मुसीबत को मिलकर दूर करना.

Story No. 4 – अंगूर खट्टे है (The Grapes Are Sour)

एक बार एक लोमड़ी बहुत भूखी थी. वह भोजन की तलाश में इधर – उधर भटकती रही लेकिन कही से भी उसे कुछ भी खाने को नहीं मिला. अंत में थक हारकर वह एक बाग़ में पहुँच गयी. वहां उसने अंगूर की एक बेल देखी. जिसपर अंगूर के गुच्छे लगे थे.

वह उन्हें देखकर बहुत खुश हुई. वह अंगूरों को खाना चाहती थी, पर अंगूर बहुत ऊँचे थे. वह अंगूरों को पाने के लिए ऊँची – ऊँची छलांगे लगाने लगी. किन्तु वह उन तक पहुँच न सकी. वह ऐसा करते – करते बहुत थक चुकी थी. आखिर वह बाग से बाहर जाते हुए कहने लगी कि अंगूर खट्टे है. अगर मैं इन्हें खाऊँगी तो बीमार हो जाउंगी.

इस कहानी से शिक्षा :

दोस्तों कभी भी हो हमें हर चीज या हालात में हमेशा अच्छाई ढूंढनी चहिये. हम अगर कोई चीज प्राप्त न कर सके तो उसे बुरा नहीं कहना चाहिए. बहुत सारे लोगो की यह प्रॉब्लम होती है की वह अगर किसी चीज में Succes नहीं हुए या कोई काम कर न सके तो वह खुद में कमियां देखने के बजाय उस काम में ही कमियाँ निकालने लगते है. हमें लोमड़ी की तरह अंगूर खट्टे है कभी नहीं बोलना है.

Story No. 5 – लालची कुत्ता (A Greedy Dog)

एक गाँव में एक कुत्ता था. वह बहुत लालची था. वह भोजन की खोज में इधर – उधर भटकता रहा. लेकिन कही भी उसे भोजन नहीं मिला. अंत में उसे एक होटल के बाहर से मांस का एक टुकड़ा मिला. वह उसे अकेले में बैठकर खाना चाहता था. इसलिए वह उसे लेकर भाग गया.

एकांत स्थल की खोज करते – करते वह एक नदी के किनारे पहुँच गया. अचानक उसने अपनी परछाई नदी में देखी. उसने समझा की पानी में कोई दूसरा कुत्ता है जिसके मुँह में भी मांस का टुकड़ा है.

उसने सोचा क्यों न इसका टुकड़ा भी छीन लिया जाए तो खाने का मजा दोगुना हो जाएगा. वह उस पर जोर से भौंका. भौंकने से उसका अपना मांस का टुकड़ा भी नदी में गिर पड़ा. अब वह अपना टुकड़ा भी खो बैठा. अब वह बहुत पछताया तथा मुँह लटकाता हुआ गाँव को वापस आ गया.

इस कहानी से शिक्षा :

लालच बुरी बला है. हमें कभी भी लालच नहीं करना चाहिए. जो भी इंसान लालच करता है वह अपनी लाइफ में कभी भी खुश नहीं रह सकता. हमें अपनी मेहनत या किस्मत का जितना भी मिल गया. उससे अपना काम निकालना चाहिए.

लेकिन अगर हम थोड़ा ज्यादा के चक्कर में लालच करेंगे तो हमारे पास अभी जितना है उससे भी हाथ धोना पड़ सकता है. इसलिए कहते है ज्यादा लालच अच्छा नहीं होता.

दोस्तों ! हमें पूरी उम्मीद है की आपको पंचतन्त्र की ये 5 प्रसिद्ध कहानियाँ जरुर पसंद आई होगी. अपनी राय अवश्य दे.

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ऋषि और एक चूहे की कहानी

एक वन में एक महातप नाम के ऋषि रहते थे. उनके डेरे पर बहुत दिनों से एक चूहा भी रहता आ रहा था. यह चूहा ऋषि से बहुत प्यार करता था.

जब वे तपस्या में मग्न होते तो वह बड़े आनंद से उनके पास बैठा भजन सुनता रहता. यहाँ तक कि वह स्वयं भी ईश्वर की उपासना करने लगा था. लेकिन कुत्ते – बिल्ली और चील – कौवे आदि से वह सदा डरा – डरा और सहमा हुआ सा रहता.

Rat became a Lion In Hindi
चूहा बना शेर

एक बार ऋषि के मन में दया आ गयी. वे सोचने लगे कि यह बेचारा चूहा हर समय डरा – सा रहता है, क्यों न इसे शेर बना दिया जाए. ताकि इस बेचारे का डर समाप्त हो जाए और यह बेधड़क होकर हर स्थान पर घूम सके.

महातप ऋषि बहुत बड़ी शक्ति के स्वामी थे. भगवान से जो भी मांगते थे, उन्हें वही मिल जाता. बस, उसी समय उन्होंने सच्चे मन से ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहा कि हे प्रभु ! इस चूहे को शेर बना दे ताकि यह बेचारा किसी भी जानवर से न डरे और निर्भय होकर जहाँ चाहे घूम सके.

ईश्वर ने उनकी प्रार्थना सुन ली और उसी समय वह चूहा शेर बन गया. चूहे से शेर बनते ही चूहे की सारी सोच बदल गई. वह सारे वन में बेधड़क घूमता. उससे अब सारे जानवर डरने लगे और प्रणाम करने लगे. उसकी जय – जयकार होने लगी. किन्तु ऋषि ही यह बात जानते थे कि यह मात्र एक चूहा है. वास्तव में शेर नहीं है.

अतः उसे चूहा समझकर ही व्यवहार करते. यह बात उसे पसंद नहीं आई. अब भी कोई उसे चूहा समझ कर ही व्यवहार करे. इससे तो दूसरे जानवरों पर बुरा असर पड़ेगा. लोग उसका जितना मान करते है, उससे अधिक घृणा और अनादर करना आरम्भ कर देंगे.

अतः चूहे ने सोचा कि क्यों न मैं इस ऋषि को मार डालूं. फिर न रहेगा बाँस, न बजेगी बांसुरी.यही सोचकर वह ऋषि को मारने के लिए चल पड़ा. ऋषि ने जैसे ही क्रोध से भरे शेर को अपनी ओर आते देखा तो वे उसके मन की बात समझ गये. उनके शेर पर बड़ा क्रोध आया.

अतः उसका घमंड तोड़ने के लिए उन्होंने अपनी शक्ति से उसे एक बार फिर चूहा बना दिया.

इस कहानी से शिक्षा :

दोस्तों ! हमें कभी भी अपने हितैषी का अहित नहीं करना चाहिए, चाहे हम कितने ही बलशाली क्यों न हो जाए. हमें उन लोगो को हमेशा याद रखना चाहिए जिन्होंने बुरे वक्त में हमारा साथ दिया होता है.

इसके अलावा हमें अपने बीते वक्त को भी नहीं भूलना चाहिए. चूहा यदि अपनी असलियत याद रखता तो उसे फिर से चूहा नहीं बनना पड़ता. बीता हुआ समय हमें घमंड से बाहर निकालता है.

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शेर और भैंस की कहानी

एक बार की बात है.. एक जंगल में जंगली भैंसों का झुण्ड घूम रहा था जिसमे एक छोटा बछड़ा भी अपने पिता यानि भैंसे के साथ चलने में लगा था. तभी वह छोटा बछड़ा बोला, ” पिताजी, आप मुझे यह बताये क्या इस जंगल में कोई ऐसी चीज है जिससे हमें डरने की जरूरत है ?

भैंसा बोला, ” तुम बस शेरो से सावधान रहना.

 Buffalo and Lion

हाँ, यह मैंने भी सुना है कि शेर बहुत ही खूंखार और खतरनाक होते है. मेरी जिंदगी में अगर कभी मेरे सामने शेर आएगा तो मैं जितना हो सके उतनी तेजी से दौड़ लगा के भाग जाऊंगा, ” बछड़ा बोला.

ऐसा करना तो बहुत ही बुरी बात हुई. यह ठीक नहीं हुआ, ” भैंसा बोला

बछड़े को यह बात सुनकर थोड़ा आश्चर्य हुआ और बोला, ” क्यों ? शेर तो बहुत ही खतरनाक होते है और मैं अगर भागूँगा नहीं तो वे तो मेरी जान ले लेंगे और मुझे मार देंगे.

भैंसा बोला, ” तुम ठीक कहते हो परन्तु अगर तुम शेर को देखकर भागने लगे तो वे तुम्हारा पीछा करने लग जायेंगे और तब भागते समय वो तुम्हारी पीठ पर बहुत ही आसानी से हमला कर सकते है और तुमको नीचे गिरा सकते है, अगर तुम एक बार भी नीचे गिर गये तो समझ लो की तुम्हारी मौत पक्की है.

तो फिर मुझे ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिये, ” बछड़े ने पुछा.

भैंसा उसे बड़ी गंभीरता से समझाने लगा और बोला, ” अगर कभी भी तुम शेर को देखो या उससे सामना हो जाए तब तुम अपनी जगह पर डटकर खड़े हो जाओ और उसे यह दिखाओ की तुम बिल्कुल भी डरे नहीं हो. अगर वो वहां से न जाए तो उसे अपनी तेज सींगे दिखाओ और अपने खुरों को जमीन पर पटको. अगर फिर भी शेर न जाए तो धीरे – धीरे उसके सामने की ओर बढ़ो और फिर तेजी से पूरी ताकत लगा कर उसपर हमला कर दो.

 ऐसा करने पर तो बहुत ही खतरा हुआ, यह तो पागलों वाला काम हुआ. अगर शेर पलट कर मुझ पर ही झपट पड़ा तो ? बछड़ा हडबडाहट में बोला.

 तुम अपने चारो तरफ देखो.. तुमको क्या दिखाई देता है ? भैंसा बोला.

 बछड़े ने चारो तरफ देखा तो उसके आसपास ताकतवर भैंसों का बहुत बड़ा झुण्ड था.

 जीवन में अगर कभी भी तुम पर मुसीबत आये तो यह याद रखना की हम सब तुम्हारे साथ है. अगर तुम उस मुसीबत का सामने करने के बजाय भाग जाओगे तो हम तुम्हे नहीं बचा पाएंगे पर अगर तुम हिम्मत करके उस मुसीबत का सामना करोगे तो हम सब तुम्हारी सहायता के लिए तुम्हारे साथ आ जायेंगे.

 बछड़ा यह सुनकर खुश हुआ और अपने पिता को इतनी सीख देने के लिए धन्यवाद दिया.

 दोस्तों हमें इस कहानी से बहुत कुछ सीखना चाहिए.. मुसीबत हम सभी की ज़िन्दगी में आती है किन्तु वही इस मुसीबत से लड़ सकता है जो हिम्मत करके उस मुसीबत का सामना करे. हमारी ज़िन्दगी में भी कई ऐसी समस्याएँ होती है जिनसे हम डरते है और उस समस्या से भागना चाहते है और जब हम भागने लग जाते है तो वह हमारा पीछा करती है और हमारा जीना मुश्किल कर देती है.

 इसलिए उन समस्याओ को देखकर भागे नहीं बल्कि उन समस्याओ को हल करने के बारे में सोचे या मुसीबत से निकलने के लिए पुरे साहस के साथ लड़ते रहे. अगर आप उन मुसीबत या बुरे वक्त से नहीं डरोगे तो आपके परिवार वाले और दोस्त भी आपके साथ हमेशा खड़े रहेंगे और आपकी सहायता करेंगे.

 

  

ENGLISH POEM

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                 सोच – समझ कर बोलें

 

एक मुर्ख बिना सोचे – समझे कुछ भी बोल देता है, पर एक बुद्धिमान सोच – विचार कर ही कुछ कहता है.

शिव खेड़ा

जो मन में आये, वही बोलने से बाद में आदमी को वह सुनना पड़ता है, जो उसे पसंद नहीं होता. बोलने और व्यवहार करने में चतुर बने. इसका तात्पर्य यह है कि हम कुछ कहते वक्त अपने शब्दों का चुनाव होशियारी और समझदारी से करे

साथ ही इस बात का अनुमान भी हमें होना चाहिए कि उस बोलने का क्या परिणाम निकलेगा. अगर हम यह अनुमान लगाने में सक्षम होंगे, तो हम आसानी से विचार कर सकते है कि हमें क्या बोलना चाहिए और क्या नहीं बोलना चाहिए.

 बोलने की कला और व्यवहार कुशलता के बगैर प्रतिभा हमेशा हमारे काम नहीं आ सकती. शब्दों से हमारा नजरिया झलकता है. शब्द दिलों को जोड़ सकते है, तो हमारी भावनाओ को चोट भी पहुंचा सकते है और रिश्तों में दरार भी पैदा कर सकते है. सोच कर बोले, न की बोल के सोचे. समझदारी और बेवकूफी में यही बड़ा फर्क है.

 आइये इस बात को एक कहानी के माध्यम से समझते है-

 एक व्यक्ति ने एक पादरी के सामने अपने पड़ोसी की खूब निंदा कि. बाद में जब उसे अपनी गलती का अहसास हुआ, तो वह पुनः पादरी के पास पहुंचा और उस गलती के लिए क्षमा याचना करने लगा. पादरी ने उससे कहा कि वह पंखो से भरा एक थैला शहर के बीचोबीच बिखेर दे. उस व्यक्ति ने पादरी कि बात सुनकर ऐसा ही किया और फिर पादरी के पास पहुँच गया.

 उस व्यक्ति की बात सुनकर पादरी ने उससे कहा कि जाओ और उन सभी पंखो को फिर से थैले में भरकर वापस ले आओ. वह व्यक्ति थोड़ा हिचका पर पादरी का आदेश मानते हुए उसने ऐसा करने की कोशिश की. काफी प्रयत्न करने के बाद भी वह सभी पंखो जमा नहीं कर सका. जब आधा भरा थैला लेकर वह पादरी के सामने पहुंचा तो पादरी ने उससे कहा की यही बात हमारे जीवन में भी लागू होती है.

 जिस तरह तुम पंख वापस नहीं ला सकते, उसी तरह तुम्हारे कटु वचन को भी वापस नहीं किया जा सकता. उस व्यक्ति का जो नुकसान हुआ है, अब उसकी भरपाई संभव नहीं है. आलोचना का मतलब नकारात्मक बातें करना और शिकायत करना ही नहीं होता बल्कि आलोचना सकारात्मक भी हो सकती है. आपकी कोशिश यह होनी चहिये की आपकी आलोचना से, आपके द्वारा सुझाये विचारो से उसकी सहायता हो जाएँ.

 दोस्तों कई बार देखा गया है कि माँ – बाप के द्वारा बच्चो से की गई बातचीत का ढंग उनके भविष्य कि रूपरेखा भी तय कर देता है. इसलिए घर से लेकर बाहर तक कुछ भी कहने में सावधानी बरतें. यही बात दोस्तों के साथ होने वाली बातचीत में भी लागू होती है और ऑफिस या इंटरव्यू के दौरान भी लागू होती है. इसलिए अगर आप समझ कर बोलेंगे तो हमेशा फायदे में रहेंगे.

अकबर – बीरबल के रोचक किस्से

 

 

सम्राट अकबर की राज्यसभा में उनके नौ रत्न थे. उन रत्नों में बीरबल प्रमुख थे. अकबर समय-समय पर उन विद्वानों के सामने किसी समस्या के प्रश्नों को पूछते रहते थे.

 

सब अपनी बुद्धि से समाधान करते थे लेकिन उनमे सभी बीरबल के उत्तरों की प्रशंसा करते थे. बीरबल की बुद्धिमता के कई किस्से आपने जरुर सुने होंगे. यहाँ आज हम आपके सामने बीरबल की बुद्दिमानी का एक बेहतरीन किस्सा शेयर कर रहे है.

एक दिन उन विद्वानों के समक्ष अकबर ने प्रश्न पूछे- किस पौधे का फूल उत्तम होता है ?

दूध किसका श्रेष्ठ है ? किसका मिठास अच्छा है ? कौन सा पत्ता अच्छा है ?  राजाओ में कौन प्रशंसनीय है ?उन सभा के पंडितो के बीच में किसी ने गुलाब को और किसी ने कमल को अच्छा बताया. किसी ने गाय के दूध को और किसी ने बकरी के दूध को अच्छा बताया. किसी ने गन्ने के रस को और किसी ने शहद के मिठास की प्रसंशा की.

दूध किसका श्रेष्ठ है ? किसका मिठास अच्छा है ? कौन सा पत्ता अच्छा है ?  राजाओ में कौन प्रशंसनीय है ?उन सभा के पंडितो के बीच में किसी ने गुलाब को और किसी ने कमल को अच्छा बताया. किसी ने गाय के दूध को और किसी ने बकरी के दूध को अच्छा बताया. किसी ने गन्ने के रस को और किसी ने शहद के मिठास की प्रसंशा की.

पत्तो में किसी ने केले के पत्तो को और किसी ने नींबू के पेड़ के पत्तो को अच्छा बताया. उत्तम राजा के नाम का निर्देश करने में भी भिन्न-भिन्न मत थे. किसी ने अकबर को ही राजाओ में बुद्धिमान बताया. अकबर ने सबके उत्तरों को सुना. वहां बीरबल को चुप देखकर अकबर ने उनसे अपना मत बताने के लिए आदेश दिया.

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तब बीरबल बोला- राजन, फूल तो कपास का श्रेष्ठ है क्योंकि उससे वस्त्र बनाये जाते है. निर्धन लोग भी उन वस्त्रो से शरीर को ढकते है. दूध माता का ही अच्छा है क्योंकि उसके पोषक बच्चो के लिए और कुछ भी नहीं है. मिठास जीभ का ही प्रशंसनीय है जो दूसरो को भी वश में करता है.

 

पत्ता पान का ही प्रशंसनीय होता है क्योंकि उसे शत्रु को भी दिए जाने से वह मित्र हो जाये. राजाओ में इन्द्र श्रेष्ठ है क्योंकि उसकी कृपा से भूमि में जलवृष्टि होती है.

यह सब सुनकर सभी ने बीरबल के उत्तरों का अभिनन्दन किया. इसके बाद सम्राट अकबर ने बार-बार बीरबल की प्रशंसा की.

 

 
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