केंद्रिय विद्यालय में कैंसर जागरूकता एवम् सतर्कता अभियान

आज दिनांक 27 अप्रैल 2017 में केंद्रीय  विद्यालय लखीमपुर – खीरी के विद्यार्थियों को कैन्सर की विस्तृत जानकारी दे कर उन्हें भविष्य में इस प्राण घातक एवम् लाईलाज बीमारी के प्रति जागरूक एवम् सतर्क किया गया I आज के बच्चे ही भावी  स्वच्छ एवम् स्वस्थ भारत के निर्माता होंगे I ” कैंसर जागरूकता एवम् सतर्कता अभियान” विषय पर  विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती सावित्री देवी ने अपने अभिभाषण में कहा कि सही समय पर सही जानकारी एवम्  सही उपाय कर  ही हम इस  प्राण घातक एवम् लाईलाज बीमारी से अपना, अपने समाज एवम् अपने देश को स्वस्थ एवम् विकसित कर सकते हैं I इस का सफल एवम सार्थक संचालन वियालय की हिन्दी शिक्षिका श्रीमती मधु शर्मा ने किया I विद्यालय के पुस्तकालायाधक्ष श्री जयन्त कुमार सिंघा ने कम्पुटरीकृत सूचना एवम् सम्प्रेषण सेवाएँ प्रदान कर कैंसर सम्बन्धित सम्पूर्ण जानकारी  चलचित्र के माध्यम से उपलब्ध किया I

kendriyaWhat Is Cancer In Hindi: कैंसर जानलेवा बीमारी है। कैंसर के मरीज जल्‍दी ठीक नही होते हैं क्‍योंकि इसके लक्षणों का पता देर से चलता है। कैंसर के बारे में ज्‍यादा जानकारी के लिए इस केटेगरी को पढ़ें। कैंसर क्‍या है, कैंसर के लक्षण क्‍या हैं, कैंसर के विभिन्‍न प्रकार, सर्वाइकल कैंसर, ब्‍लैडर कैंसर, कोलोरेक्‍टल कैंसर, स्‍तन कैंसर, ब्रेन ट्यूमर, एसोफैगल कैंसर, पैंक्रियाटिक कैंसर, बोन कैंसर ब्‍लड कैंसर, इत्यादि I

ओरल कैंसर: Oral Cancer in Hindi: जब शरीर के ओरल कैविटी के किसी भी भाग में कैंसर होता है तो इसे ओरल कैंसर कहा जाता है। ओरल कैविटी में होंठ, गाल, लार ग्रंथिया, कोमल व हार्ड तालू, यूवुला, मसूडों, टॉन्सिल, जीभ और जीभ के अंदर का हिस्‍सा आते हैं। इस कैंसर के होने का कारण ओरल कैविटी के भागों में कोशिकाओं की अनियमित वृद्धि होती है। ओरल कैंसर होने का जोखिम उम्र के साथ बढ़ता है। ओरल कैंसर के कई कारण जैसे, तम्‍बाकू (तंबाकू, सिगरेट, पान मसाला, पान, गुटखा) व शराब का अधिक तथा ओरल सेक्स व मुंह की साफ-सफाई ठीक से न करना आदि हैं। इसकी पहचान के लिये डॉक्टर होठों, ओरल कैविटी, फारनेक्स (मुंह के पीछे, चेहरा और गर्दन) में शारीरिक जांच कर किसी प्रकार की सूजन, धब्बे वाले टिश्यू व घाव आदि की जांच करता है। कोई भी जख्म या अल्सर आदि मिलने पर उसकी बायोप्सी की जाती है, इसके बाद एंडोस्‍कोपिक जांच, इमेजिंग इन्वेस्टिगेशन्स (कम्प्यूटिड टोमोग्राफी अर्थात सीटी), मैगनेटिक रिसोनेन्स इमेजिंग (एमआरआई) और अल्ट्रासोनोग्राफी आदि की मदद से कैंसर की स्टेजेज का पता लगाया जाता है। इसका उपचार हर मरीज के लिए अलग हो सकता है।

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