दयनीय भारत के दर्द भरे गीत

त्रेता युग भगवान श्री राम चन्द्र जी माता सीताजी से कहा था कि कलियुग में भारत में भ्रष्टाचार अपने चरम पर रहेगा I कालाधन , कालाव्यापार और  रिश्वत बाज़ार भी गरम रहेगा I जिसके हाथ में लाठी होगी भैंस वही ले जायेगा . यही अनैतिकता भी अपने चरमोत्कर्ष पर होगी . माता – पिता भी अपने जिगर टुकड़ों द्वारा अपमानित एवम्  अपने ही बेघर किये जायेगे I जो होंगे ढोंगी और भोगी सन्त वही कहलायेंगे I

ऐसे लोगों से ३६ का आँकड़ा बनाकर ही रहना ठीक होगा जिनकी फितरत छिपी रहती है , नकली चेहरा सामने रहता है और असली सूरत छिपी रहती है I जिनके दान के चर्चे घर – घर फैले रहते हैं और लूट की दौलत छिपी रहती है I आईये ! इनको गौर से पहचान लीजिये I इन विषधर नागों को समय रहते पहचान लीजिये क्योंकि इनका कटा हुआ पानी भी नहीं माँग पाता I क्योंकि इस अंजुमन में आपको आना है बार – बार I फिर मत कहियेगा कि :

हम थे जिनके सहारे , वो हुए ना हमारे I

डूबी जब दिल नईया , सामने थे किनारे II

इनकी पहचान के लिये ये गीत पर्याप्त है : –

 

 

 

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