आदित्य सिंह की अपनी पूजनीय माताजी पर कविता

माँ का उपकार

खुद को त्याग कर , मान लिया मुझे अपना भविष्य I

मैं तुझे भविष्य देने से , विवश हो कर कतराता हूँ II

छोड़ दूंगा दुनियाँ को , पर  माँ तुझे न छोडूंगा I

जीवन भर माँ मैं , तेरे ही गुण गाऊंगा I

 वृद्धाश्रम का नाम नहीं , दूंगा तुमको जन्नत का , मैं सारा आराम II

जब तक मैं यह कर न सकूँ , तब तक न लूंगा मैं विश्राम II

त्याग कर खुद को जलती है , पर मुझे आँच न आने देती है I

थोड़ा मारती , थोड़ा समझाती , पर मेरा जीवन सँवारती है II

जब मैं रोता हूँ , तब तूँ रोती I

पर मुझे आभास न होने देती II

भूखे हो कर भी खुद , मेरे पेट को भरती है I

 पलभर भी आँखों से अपने , दूर नहीं होने देती II

दूर हूँ तुमसे , पर दिल से मैं दूर नहीं I

जल्दी ही आऊंगा , मैं तेरे सब काम I

हे माँ , तुझे मेरा प्रणाम II

 

माँ के श्री चरणों में सादर समर्पित : – आदित्य सिंह    

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