पर्यावरण प्रदूषण पर कविताएँ

पेड़ का दर्द

कितने प्यार से किसी ने
बरसों पहले मुझे बोया था
हवा के मंद मंद झोंको ने
लोरी गाकर सुलाया  था ।
कितना विशाल घना वृक्ष
आज  मैं  हो  गया  हूँ
फल फूलो से लदा
पौधे से वृक्ष हो गया हूँ  ।
कभी कभी मन में
एकाएक विचार करता हूँ
आप सब मानवों से
एक सवाल करता हूँ  ।
दूसरे पेड़ों की भाँति
क्या मैं भी काटा जाऊँगा
अन्य वृक्षों की भाँति
क्या मैं भी वीरगति पाउँगा ।
क्यों बेरहमी से मेरे सीने
पर कुल्हाड़ी चलाते हो
क्यों बर्बरता से सीने
को छलनी करते हो ।
मैं तो तुम्हारा सुख
दुःख का साथी हूँ
मैं तो तुम्हारे लिए
साँसों की भाँति हूँ।
मैं तो तुम लोगों को
देता हीं देता हूँ
पर बदले में
कछ नहीं लेता हूँ  ।
प्राण वायु  देकर तुम पर
कितना उपकार करता हूँ
फल-फूल देकर तुम्हें
भोजन देता हूँ।
दूषित हवा लेकर
स्वच्छ हवा देता हूँ
पर बदले में कुछ नहीं
तुम से लेता हूँ ।
ना काटो मुझे
ना काटो मुझे
यही मेरा दर्द है।
यही मेरी गुहार है।
यही मेरी पुकार  है।
– अंजू गोयल

 

भारत को स्वच्छ बनाना है

भारत को स्वच्छ बनाना है
भारत को ऊँचा उठाना है
हम सबको ही मिल करके
सम्भव हर यत्न करके
बीडा़ यही उठाना है
भारत को स्वच्छ बनाना है
भारत को ऊँचा उठाना है
होगा जब ये भारत स्वच्छ
सब जन होंगे तभी स्वस्थ
सबको यही समझाना है
भारत को स्वच्छ बनाना है
भारत को ऊँचा उठाना है
गंगा माँ के जल को भी
यमुना माँ के जल को भी
मोती सा फिर चमकाना है
भारत को स्वच्छ बनाना है
भारत को ऊँचा उठाना है
आओ मिल कर करें संकल्प
होना मन में कोइ विकल्प
गन्दगी को दूर भगाना है
भारत को स्वच्छ बनाना है
भारत को ऊँचा उठाना है
देश को विकसित करने का
जग में उन्नति बढ़ाने का
नई नीति सदा बनाना है
भारत को स्वच्छ बनाना है
भारत को ऊँचा उठाना है
हम सबको ही मिल करके
हर बुराई को दूर करके
आतंकवाद को भी मिटाना है
भारत को स्वच्छ बनाना है
भारत को ऊँचा उठाना है
मानवता को दिल में रखके
धर्म का सदा आचरण करके
देश से कलह मिटाना है
भारत को स्वच्छ बनाना है
भारत को ऊँचा उठाना है
सत्य अहिंसा न्याय को लाकर
सबके दिल में प्यार जगाकर
स्वर्ग को धरा पर लाना है
भारत को स्वच्छ बनाना है
भारत को ऊँचा उठाना है
– कंचन पाण्डेय ( Kanchan Pandey )

 

भोजन तथा स्वास्थ्य

भोजन मेँ रखिए सदा, पौष्टिकता का ध्यान ।
गरिष्ठ भोजन नहिँ ठीक है, ऐसा तो हो ज्ञान ॥
ताजा भोजन जो करै, शुद्ध पियै अरु तोय ।
उसको तो फिर न कभी, रोग पेट का होय ॥
लहसुन और प्याज हो, भोजन मेँ भरपूर ।
स्वाद भी अच्छा रहे, रोग रहेँ सब दूर ॥

मुरगे की बोली से जाना, क्या तुमने संदेश ।

प्रातःकाल उठ जाने का, वह देता उपदेश ॥

प्रातःकाल ही जो उठे, और टहलने जाय ।
स्वास्थ्य लाभ उसको मिले, क्योँ न वह हरसाय ॥
ध्यान स्वास्थ्य का रख सदा, यह तो है अनमोल ।
देखभाल मेँ तू कभी,    मत कर टाल-मटोल ॥
अच्छे स्वास्थ्य के लिए,करते रहो कुछ काम ।
यदि आवश्यक हो तो,  कर लो कुछ व्यायाम ॥
जो तू चाहे स्वास्थ्य भला, तो मेरा कहना मान ।
फिर तो सदा ही चाहिए, चेहरे पर मुस्कान ॥
यदि कोई चाहे कि उसका,स्वास्थ्य न होय खराब ।
फिर तो उसे नहिँ चाहिए,पीना कभी शराब ॥
जो चाहो अपना भला, तो मत पियो शराब ।
इससे तो सब ही गये, तन मन धन अरु आब ॥
प्रातःकाल जो उठहिँ, सेवहिँ शुद्ध समीर ।
जीवन मेँ नहिँ हो सके, उनको रोग गंभीर ॥

 

आओ पेड़ लगायें

बहुत लुभाता है गर्मी में,

अगर कहीं हो बड़ का पेड़।

निकट बुलाता पास बिठाता

ठंडी छाया वाला पेड़।

तापमान धरती का बढ़ता

ऊंचा-ऊंचा, दिन-दिन ऊंचा

झुलस रहा गर्मी से आंगन

गांव-मोहल्ला कूंचा-कूंचा।

 

 

पर्यावरण बचाने की प्रेरणा देती एक कविता : चि‍ड़िया की पुकार

 

चि‍ड़िया चहक-चहक कहती

सुबह-शाम मैं गगन में रहती

कब तक मैं अब उड़ पाऊंगी

प्रदूषित हवा नहीं सह पाऊंगी।

 

दम घुटता है अब तो मेरा

दे दो अब तो सुखद सबेरा

तभी तुम्हारा आंगन चहकेगा

चमन भी खुशबू से महकेगा I

 

पर्यावरण

पर्यावरण को बचाना हमारा ध्येय हो
सबके पास इसके लिए समय हो
पर्यावरण अगर नहीं रहेगा सुरक्षित
हो जायेगा सबकुछ दूषित
भले ही आप पेड़ लगाये एक
पूरी तरह करे उसकी देखरेख
सौर उर्जा का करे सब उपयोग
कम करे ताप विद्युत् का उपभोग
रासायनिक खाद का कम करे छिडकाव
भूमि को प्रदूषित होने से बचाव
कचड़ो का समुचित रीती से करो निपटारा
फैक्ट्रियो में जब सौर यन्त्र लगाई जाएँगी
वायु प्रदुषण में अपने आप कमी आएँगी
तब जाकर पर्यावरण प्रदुषण में कमी आएँगी
आधी बीमारिया अपने आप चली जाएगी I

प्रकीर्ति

माँ की तरह हम पर प्यार लुटाती है प्रकृति
बिना मांगे हमें कितना कुछ देती जाती है प्रकृति…..
दिन में सूरज की रोशनी देती है प्रकृति
रात में शीतल चाँदनी लाती है प्रकृति……
भूमिगत जल से हमारी प्यास बुझाती है प्रकृति
और बारिश में रिमझिम जल बरसाती है प्रकृति…..
दिन-रात प्राणदायिनी हवा चलाती है प्रकृति
मुफ्त में हमें ढेरों साधन उपलब्ध कराती है प्रकृति…..
कहीं रेगिस्तान तो कहीं बर्फ बिछा रखे हैं इसने
कहीं पर्वत खड़े किए तो कहीं नदी बहा रखे हैं इसने…….
कहीं गहरे खाई खोदे तो कहीं बंजर जमीन बना रखे हैं इसने
कहीं फूलों की वादियाँ बसाई तो कहीं हरियाली की चादर बिछाई है इसने.
मानव इसका उपयोग करे इससे, इसे कोई ऐतराज नहीं
लेकिन मानव इसकी सीमाओं को तोड़े यह इसको मंजूर नहीं……..
जब-जब मानव उदंडता करता है, तब-तब चेतवानी देती है यह
जब-जब इसकी चेतावनी नजरअंदाज की जाती है, तब-तब सजा देती है यह….
विकास की दौड़ में प्रकृति को नजरंदाज करना बुद्धिमानी नहीं है
क्योंकि सवाल है हमारे भविष्य का, यह कोई खेल-कहानी नहीं है…..
मानव प्रकृति के अनुसार चले यही मानव के हित में है
प्रकृति का सम्मान करें सब, यही हमारे हित में है…….

प्रकृति का दुश्मन मानव

प्रकृति ने अच्छा दृश्य रचा
इसका उपभोग करें मानव।
प्रकृति के नियमों का उल्लंघन करके
हम क्यों बन रहे हैं दानव।
ऊँचे वृक्ष घने जंगल ये
सब हैं प्रकृति के वरदान।
इसे नष्ट करने के लिए
तत्पर खड़ा है क्यों इंसान।
इस धरती ने सोना उगला
उगलें हैं हीरों के खान
इसे नष्ट करने के लिए
तत्पर खड़ा है क्यों इंसान।
धरती हमारी माता है
हमें कहते हैं वेद पुराण
इसे नष्ट करने के लिए
तत्पर खड़ा है क्यों इंसान।
हमने अपने कूकर्मों से
हरियाली को कर डाला शमशान
इसे नष्ट करने के लिए
तत्पर खड़ा है क्यों इंसान।

 

 सफाई

पास रखो अपने हरदम सफाई ,

नहीं होगी इससे बीमारी भाई …..

रोज नहाओ मसलकर तुम ,

होगी गन्दगी इससे गुम …..

कपड़े रखो हरदम साफ,

होगा इससे बहुत लाभ …..

वातावरण को भी रखो साफ तुम,

बीमारी होगी इससे गुम……

स्वच्छता अभियान

आओ सीखो तुम्हें सीखाएँ ,  स्वच्छता के अभियान की I

इन बातों को अमल करो , तो रक्षा होगी जान की II

बापूजी ने की सफाई , मलीन हिंदुस्तान की I

हम बच्चे अब करेंगे मिलकर , सफाई हिन्दुस्तान की II

शरीर को अपने साफ रखेंगे , घर भी अपने जान से I

हम भी नायक हैं प्यारे , स्वच्छ भारत अभियान के II

नहीं करेंगे  ,करने नहीं देंगे, गन्दी , धरती हिंदुस्तान की I

इन बातों को अमल करो , तो रक्षा होगी जान की II

साफ़ – सफाई देश की , ये शिक्षा है अभियान की I

           लक्ष्मीजी भी रक्षा करतीं ,  केवल स्वच्छ मकान की II

 बिमारियों को  नष्ट करे , सफाई देश महान की I

                                          हरा – भरा हो देश हमारा , चर्चा स्वस्थ  महान की II

हमको है अभिमान , अपने , भारत स्वच्छ महान की।

                                     इन बातों को अमल करो , तो रक्षा होगी जान की II

प्रिय पाठकों एवम् श्रोताओं अब आप लोग स्वच्छ एवम् स्वस्थ पर्यावरण से लाभ और प्रदूषण से होनेवाली जानलेवा बिमारियों से बचने के लिये समय रहते उचित उपाय ढूढ लीजिये और उसका पालन कीजिये I इस प्रकार आप स्वयम स्वस्थ रह कर समस्त देश वासियों स्वस्थ एवम् भारत को स्वस्थ और विकसित करने महत्वपूर्ण योगदान कर सकते हैं I विशेष जानकारी के लिये अधोलिखित वेबसाइट को भी क्लिक करके अवलोकन कर सकते हैं : –

 

https://www.youtube.com/results?search_query=pradushan+par+kavita+lyrics

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s