स्वच्छ भारत अभियान सांस्कृतिक गतिविधियाँ

जम कर करें सफाई

स्वच्छता अभियान है आओ जम कर करें सफाई I
सभी में जोश उल्लास उमंग है सफाई की ऋतु आई I

अपनी गालियाँ चौबारे साफ करना शर्म की बात नहीं I
कोई और आकर करेगा हमारे लिए उचित यह बात नहीं I
सन्तों महात्माओं तक ने भी की है सदा खुद सफाई I
स्वच्छता अभियान है आओ जम कर करें सफाई I

दूर रखो थाली के किसी कोने में भी मत रखना जहर I
प्राण ले लेगा यह टूट पड़ेगा जीवन पर बनकर कहर I
जहर जहर है बहुत घातक है इसे दूर रखो भाई I
स्वच्छता अभियान है आओ जम कर करें सफाई I

कचरा पलंग सोफे पर कभी भी नहीं है रखना I
गन्दगी को पास रखने से हमें सदा है बचना I
अच्छे स्वास्थ्य और जीवन की यही है दवाई I
स्वच्छता अभियान है आओ जम कर करें सफाई I

पेड़ का दर्द

कितने प्यार से किसी ने
बरसों पहले मुझे बोया था
हवा के मंद मंद झोंको  ने
लोरी गाकर सुलाया  था ।
कितना विशाल घना वृक्ष
आज  मैं  हो  गया  हूँ
फल फूलो से लदा
पौधे से वृक्ष हो गया हूँ  ।
कभी कभी मन में
एकाएक विचार करता हूँ
आप सब मानवों से
एक सवाल करता हूँ  ।
दूसरे पेड़ों की भाँति
क्या मैं भी काटा जाऊँगा
अन्य वृक्षों की भाँति
क्या मैं भी वीरगति पाउँगा ।
क्यों बेरहमी से मेरे सीने
पर कुल्हाड़ी चलाते हो
क्यों बर्बरता से सीने
को छलनी करते हो ।
मैं तो तुम्हारा सुख
दुःख का साथी हूँ
मैं तो तुम्हारे लिए
साँसों की भाँति हूँ।
मैं तो तुम लोगों को
देता हीं देता हूँ
पर बदले में
कछ नहीं लेता हूँ  ।
प्राण वायु  देकर तुम पर
कितना उपकार करता हूँ
फल-फूल देकर तुम्हें
भोजन देता हूँ।
दूषित हवा लेकर
स्वच्छ हवा देता हूँ
पर बदले में कुछ नहीं
तुम से लेता हूँ ।
ना काटो मुझे
ना काटो मुझे
यही मेरा दर्द है।
यही मेरी गुहार है।
यही मेरी पुकार  है।
– अंजू गोयल

 

भारत को स्वच्छ बनाना है

भारत को स्वच्छ बनाना है
भारत को ऊँचा उठाना है
हम सबभारतको ही मिल करके

सम्भव हर यत्न करके
बीडा़ यही उठाना है
भारत को स्वच्छ बनाना है
भारत को ऊँचा उठाना है
होगा जब ये भारत स्वच्छ
सब जन होंगे तभी स्वस्थ
सबको यही समझाना है
भारत को स्वच्छ बनाना है
भारत को ऊँचा उठाना है
गंगा माँ के जल को भी
यमुना माँ के जल को भी
मोती सा फिर चमकाना है
भारत को स्वच्छ बनाना है
भारत को ऊँचा उठाना है
आओ मिल कर करें संकल्प
होना मन में कोइ विकल्प
गन्दगी को दूर भगाना है
भारत को स्वच्छ बनाना है
भारत को ऊँचा उठाना है
देश को विकसित करने का
जग में उन्नति बढ़ाने का
नई नीति सदा बनाना है
भारत को स्वच्छ बनाना है
भारत को ऊँचा उठाना है
हम सबको ही मिल करके
हर बुराई को दूर करके
आतंकवाद को भी मिटाना है
भारत को स्वच्छ बनाना है
भारत को ऊँचा उठाना है
मानवता को दिल में रखके
धर्म का सदा आचरण करके
देश से कलह मिटाना है
भारत को स्वच्छ बनाना है
भारत को ऊँचा उठाना है
सत्य अहिंसा न्याय को लाकर
सबके दिल में प्यार जगाकर
स्वर्ग को धरा पर लाना है
भारत को स्वच्छ बनाना है
भारत को ऊँचा उठाना है
– कंचन पाण्डेय ( Kanchan Pandey )

 

भोजन तथा स्वास्थ्य

भोजन मेँ रखिए सदा, पौष्टिकता का ध्यान ।
गरिष्ठ भोजन नहिँ ठीक है, ऐसा तो हो ज्ञान ॥
ताजा भोजन जो करै, शुद्ध पियै अरु तोय ।
उसको तो फिर न कभी, रोग पेट का होय ॥
लहसुन और प्याज हो, भोजन मेँ भरपूर ।
स्वाद भी अच्छा रहे, रोग रहेँ सब दूर ॥

मुरगे की बोली से जाना, क्या तुमने संदेश ।

प्रातःकाल उठ जाने का, वह देता उपदेश ॥

प्रातःकाल ही जो उठे, और टहलने जाय ।
स्वास्थ्य लाभ उसको मिले, क्योँ न वह हरसाय ॥
ध्यान स्वास्थ्य का रख सदा, यह तो है अनमोल ।
देखभाल मेँ तू कभी,    मत कर टाल-मटोल ॥
अच्छे स्वास्थ्य के लिए,करते रहो कुछ काम ।
यदि आवश्यक हो तो,  कर लो कुछ व्यायाम ॥
जो तू चाहे स्वास्थ्य भला, तो मेरा कहना मान ।
फिर तो सदा ही चाहिए, चेहरे पर मुस्कान ॥
यदि कोई चाहे कि उसका,स्वास्थ्य न होय खराब ।
फिर तो उसे नहिँ चाहिए,पीना कभी शराब ॥
जो चाहो अपना भला, तो मत पियो शराब ।
इससे तो सब ही गये, तन मन धन अरु आब ॥
प्रातःकाल जो उठहिँ, सेवहिँ शुद्ध समीर ।
जीवन मेँ नहिँ हो सके, उनको रोग गंभीर ॥

 

स्वास्थ्य कविता- ” जंक फूड “

जंक फूड, जंक फूड,
चले जाओ, चले जाओ।
जंक फूड, जंक फूड,
मेरे ट्रे में कभी नहीं देखा।।

जंक फूड, जंक फूड,
आप इतना अस्वस्थ हैं।
जंक फूड, जंक फूड,
मैं चाहता हूँ स्वस्थ रहे।।

जंक फूड, जंक फूड,
तुम मुझे मोटा बना देगा।
जंक फूड, जंक फूड,
मैं चाहता हूँ एक चूहा नहीं हो।।

जंक फूड, जंक फूड,
तुम मुझे बीमार कर देगा।
जंक फूड, जंक फूड,
तुम मेरे लेने के लिए।।

जंक फूड, जंक फूड,
तुम मेरे लिए नहीं हैं।
जंक फूड, जंक फूड
मैं तुमको नफरत है।।

 

स्वास्थ्य रक्षक कविता

स्वास्थ्य रक्षक कविता ( १ )

अरहर दाल जलाय के, दधि में देय मिलाय |
पकी खाज पर लेपिये देवे रोग मिटाय ||

गुड़ तोला प्राचीन ले, चूना माशा चार |
दोउ मिलाकर खाइए, देवे दर्द मिटाय ||

त्रिफला काला नमक को, पानी साथ सनाय |
सबहिं बराबर मापकर, नीबू रस मिलवाय ||
झरबेरी सी गोलियाँ, घोंट पीस बनवाय |
दो गोली सेवन करें, भूख बहुत बढ़ जाय ||

पत्ती पीसें नीम की, लीजै रस निकाल |
आधा तोला पीजिए, पेट कीट मिट जाय ||

पत्ती पीसें नीम की, लीजै रस निकाल |
आधा तोल पीजिये, पेटकीट मिट जाय ||

 

स्वास्थ्य रक्षक कविता  (२)

दिन   में तो  चंदा चलै ,चलै  रात में  सूर |

तो यह निश्चय जानिये,  प्राण गमन बहु दूर||

बायीं  करवट   सोइये,  जल  बायें स्वर  पीव |

दायें स्वर  भोजन करै,  सुख  पावत है  जीव ||

अधिक गर्म जो पेय पिये, और अन्न जो खाय |

वृद्धावस्था  के  पूर्व ही, बत्तीसी झड़ जाय ||

जो दातून   बबूल की ,नित्य करै  मन लाय |

टीस मिटै  मजबूत हो, पायरिया  मिट जाय ||

नीम   दतूनी  जो करै, भूनी अन्न   चबाय  |

दूध बयारी जो करै,ता घर वैद्य न जाय  ||

स्वास्थ्य रक्षक कविता…(   )

इमली पत्ती पीसकर, लीजै नमक मिलाय |

मट्ठा के सग पीजिये,   पेचिस देय मिटाय ||

नीम की पत्ती तोड़कर,   मधुरस संग पिसाय |

फोड़ा ऊपर बांध दे, मव (पीब) को देत बहाय ||

हर्र बहेरा आँवला,  घी शक्कर संग खाय  |

हाथी दाबे कांख में,   साठ कोस ले जाय ||

जो ताम्र  के पात्र में,    पिये रोज जल छान |

चर्म रोग सब दूर हों, मनुष्य होत बल्वान ||

पीली पात मदार (आक) में,  दीजै घृत लगाय |

गरम-गरम रस डालिए कर्ण-रोग मिट जाय ||

 

 

आओ पेड़ लगायें

बहुत लुभाता है गर्मी में,

अगर कहीं हो बड़ का पेड़।

निकट बुलाता पास बिठाता

ठंडी छाया वाला पेड़।

तापमान धरती का बढ़ता

ऊंचा-ऊंचा, दिन-दिन ऊंचा

झुलस रहा गर्मी से आंगन

गांव-मोहल्ला कूंचा-कूंचा।

 

धरती स्वर्ग दिखाई दे

करके ऐसा काम दिखा दो, जिस पर गर्व दिखाई दे I
इतनी खुशियाँ बाँटो सबको, हर दिन पर्व दिखाई दे II
हरे वृक्ष जो काट रहे हैं, उन्हें खूब धिक्कारो I
खुद भी पेड़ लगाओ इतने, धरती स्वर्ग दिखाई दे II 
करके ऐसा काम दिखा दो ,जिस पर गर्व दिखाई दे I

इतनी खुशियाँ बाँटो सबको, हर दिन पर्व दिखाई दे I

कोई मानव शिक्षा से भी, वंचित नहीं दिखाई दे।
सरिताओं में कूड़ा-करकट, संचित नहीं दिखाई दे I 
वृक्ष रोपकर पर्यावरण का, संरक्षण ऐसा करना,
दुष्ट प्रदूषण का भय भू पर, किंचित नहीं दिखाई दे II

करके ऐसा काम दिखा दो , जिस पर गर्व दिखाई दे I

इतनी खुशियाँ बाँटो सबको, हर दिन पर्व दिखाई दे II

हरे वृक्ष से वायु-प्रदूषण का, संहार दिखाई दे I
हरियाली और प्राणवायु का, बस अम्बार दिखाई देII
जंगल के जीवों के रक्षक, बनकर तो दिखला दो I
जिससे सुखमय प्यारा-प्यारा, ये संसार दिखाई दे II

करके ऐसा काम दिखा दो ,जिस पर गर्व दिखाई देI

इतनी खुशियाँ बाँटो सबको, हर दिन पर्व दिखाई दे II

वसुन्धरा पर स्वास्थ्य-शक्ति का, बस आधार दिखाई दे I
जड़ी-बूटियों औषधियों की, बस भरमार दिखाई दे II
जागो बच्चों, जागो मानव, यत्न करो कोई ऐसा I
कोई प्राणी इस धरती पर, ना बीमार दिखाई दे।।

करके ऐसा काम दिखा दो, जिस पर गर्व दिखाई दे I
इतनी खुशियाँ बाँटो सबको, हर दिन पर्व दिखाई दे II

 

पर्यावरण बचाने की प्रेरणा देती एक कविता : चि‍ड़िया की पुकार

 

चि‍ड़िया चहक-चहक कहती

सुबह-शाम मैं गगन में रहती

कब तक मैं अब उड़ पाऊंगी

प्रदूषित हवा नहीं सह पाऊंगी।

 

दम घुटता है अब तो मेरा

दे दो अब तो सुखद सबेरा

तभी तुम्हारा आंगन चहकेगा

चमन भी खुशबू से महकेगा I

 

 

पर्यावरण

पर्यावरण को बचाना हमारा ध्येय हो
सबके पास इसके लिए समय हो
पर्यावरण अगर नहीं रहेगा सुरक्षित
हो जायेगा सबकुछ दूषित
भले ही आप पेड़ लगाये एक
पूरी तरह करे उसकी देखरेख
सौर उर्जा का करे सब उपयोग
कम करे ताप विद्युत् का उपभोग
रासायनिक खाद का कम करे छिडकाव
भूमि को प्रदूषित होने से बचाव
कचड़ो का समुचित रीती से करो निपटारा
फैक्ट्रियो में जब सौर यन्त्र लगाई जाएँगी
वायु प्रदुषण में अपने आप कमी आएँगी
तब जाकर पर्यावरण प्रदुषण में कमी आएँगी
आधी बीमारिया अपने आप चली जाएगी

 

पर्यावरण प्रदूषण

 

रहा ना जल पीने लायक
वायु ना जीने लायक
भूमि भी हो गयी है बंझर
कैसा है ये मंझर ?
कान फोड़ती आवाजों का
फैला घातक शोर
उर्वरकों की बीमारी का
भूमि में है जोर.
पानी बिजली कि बर्बादी
नित बढ़ती ये आबादी
कूड़ेदान बनी ये नदियाँ
कलुषित हुयी ये पूरवईयां.
लुप्त हो रहे वन जंगल
लुप्त हो रहे प्राणी
लुप्त हो रही है नदियाँ
और लुप्त हो रही धानी.
जल, वायु और ये भूमि
कुछ भी स्वच्छ अब रहा नहीं
रोग मिल रहे ऐसे-ऐसे
जिनकी कोई दवा नहीं.

 

प्रदूषण

 

बड़ी बड़ी चिमनियों से निकलता ये धुआं,

है इंसानों की ज़िंदगी के लिए एक कुआँ I

धुल उडाती बड़ी गाड़ियां,

फेफड़े के लिए है बीमारियाँ I

प्रदुषण जो तेजी से बढ़ रहा है ,

नई नई बीमारियाँ पैदा कर रहा है I

वाहनों की संख्या तेज रफ़्तार से बढ़ रही है,

लोगो की मौत की नई परिभाषा गढ़ रही हैI

पेड़ रहे है तेजी से कट,

जीवन प्रत्याशा रही है घट I

प्रदुषण बढ़ रहा लगातार,

फैक्ट्रिया जो खुल रही कई हज़ार I

परमाणु उर्जा पे हो रहे हम निर्भर,

विकिरण के साथ जीना हो रहा दुभर I

नित नए हो रहे अविष्कार,

ध्वनि प्रदुषण बढ़ा रहे लगातार I

फैक्ट्रियो से छोड़े जा रहे अवशिष्ट,

मिटटी खो रही अपनी गुण विशिष्ट I

कचड़ा जो नदियों में डाला जा रहा,

जल प्रदुषण फैला रहा I

रोकना है अगर प्रदुषण बढ़ने की गति ,

तो उपयोग में लाना होगा अपना मति  I

सीमित रखो अपना उपयोग ,

मत करो संसाधनों का दुरूपयोग I

 

पर्यावरण

पर्यावरण को बचाना हमारा ध्येय हो
सबके पास इसके लिए समय हो
पर्यावरण अगर नहीं रहेगा सुरक्षित
हो जायेगा सबकुछ दूषित
भले ही आप पेड़ लगाये एक
पूरी तरह करे उसकी देखरेख
सौर उर्जा का करे सब उपयोग
कम करे ताप विद्युत् का उपभोग
रासायनिक खाद का कम करे छिडकाव
भूमि को प्रदूषित होने से बचाव
कचड़ो का समुचित रीती से करो निपटारा
फैक्ट्रियो में जब सौर यन्त्र लगाई जाएँगी
वायु प्रदुषण में अपने आप कमी आएँगी
तब जाकर पर्यावरण प्रदुषण में कमी आएँगी
आधी बीमारिया अपने आप चली जाएगी I

 

हम और हमारा स्वास्थ्य भाग – 1

हम और हमारा स्वास्थ्य भाग – 2

हम और हमारा स्वास्थ्य भाग – 3

हम और हमारा स्वास्थ्य भाग – 4

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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